नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएगा मप्र- शिवराज

  
Last Updated:  Friday, July 31, 2020  "06:06 am"

भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केंद्र द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति देश में शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। इसके क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश लीड रोल अदा करेगा। उन्होंने इसके सभी प्रावधानों पर राज्य की परिस्थितियों के अनुसार तत्परता के साथ अमल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान न देकर उनका कौशल विकसित करने के लिए प्रदेश में कक्षा छठवीं से ही व्यवसायिक शिक्षा दिए जाने के प्रावधान को जल्दी से जल्दी लागू किया जाएगा। स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत, दर्शन, कला, नृत्य के साथ ही योग का भी समावेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चिरायु अस्पताल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा विभाग की गतिविधियों तथा नई शिक्षा नीति को लेकर प्रदेश में की जाने वाली कार्रवाइयों संबंधी बैठक ले रहे थे। वीसी में स्कूल शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार इंदर सिंह परमार, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

शिक्षा मंत्री टीम गठित करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को तत्परता के साथ लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री एक टीम गठित करें जो इस बारे में कार्रवाई के लिए रूपरेखा बनाए। प्रदेश में विशेष रूप से व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाना है, जिससे कि बच्चा शुरू से ही अपने क्षेत्र में दक्षता हासिल कर ले तथा उसे भावी जीवन में एक अच्छी आजीविका प्राप्त हो सके।

कर्मयोग एवं नैतिक शिक्षा का समावेश।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूली पाठ्यक्रम में योग एवं नैतिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाए। इसके साथ ही संगीत, दर्शन कला, नृत्य, आदि विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

उच्च गुणवत्ता वाले स्कूल विकसित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में गांवों के क्लस्टर में उच्च गुणवत्ता वाले स्कूल विकसित किए जाएंगे। इस बारे में भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि प्रदेश में इस प्रकार के 10,000 स्कूल विकसित किए जाने की योजना बनाई जा रही है।

निजी स्कूल किसी विद्यार्थी का नाम नहीं काट सकेंगे

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना संकट के चलते निजी विद्यालय विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य शुल्क वसूल नहीं कर पाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करे कि यदि कोई अभिभावक बच्चे की फीस नहीं चुका पा रहा है तो भी उसका नाम विद्यालय से किसी भी हालत में नहीं कटना चाहिए। कोरोना संकटकाल में निजी विद्यालयों की समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री चौहान ने स्कूल शिक्षा मंत्री से कहा कि वे प्रदेश के स्कूल संचालकों एवं अभिभावकों से बातचीत कर हल निकाले।

कोविड-19 में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था।

प्रदेश में कोविड-19 काल में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल शिक्षा प्रारंभ होगी जो उन्हें प्रत्येक सप्ताह 3 दिन दी जाएगी तथा प्रतिदिन 30 मिनट का समय निर्धारित होगा। इसके अलावा पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में सप्ताह में 5 दिन तथा हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल में सप्ताह में 6 दिन डिजिटल शिक्षा दी जाएगी।

लैपटॉप वितरण के लिए रूपरेखा बनाएं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि प्रदेश में 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण के लिए रूपरेखा बनाई जाए। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि इस कार्य में लगभग ₹40 करोड़ की राशि खर्च होगी।

328 शाला भवनों का होगा लोकार्पण।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि प्रदेश में 328 स्कूल भवन पूर्ण हो गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों, सांसदों आदि के माध्यम से इनका लोकार्पण कराए जाने की रूपरेखा बनाई जाए।

गांवों में टीवी के माध्यम से शिक्षा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि कोरोना संकटकाल में गांवों में टीवी के माध्यम से शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने एवं शिक्षा देने की व्यवस्था की जाए। इससे विद्यार्थी अपने घर बैठे ही टीवी पर शैक्षणिक सामग्री प्राप्त कर सकेंगे। बताया गया कि इसके लिए रिलायंस कंपनी ,”जिओ टीवी एप” की सेवा प्रदेश में निशुल्क प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस कार्य को अभियान के रूप में जन सहयोग से किया जाए। ग्राम पंचायत आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें।

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