सादगी, सरलता और सहजता के पर्याय ओलंपियन सुशील कुमार

  
Last Updated:  Thursday, December 17, 2020  "08:02 am"

कहता है दिल…. संस्मरण……,5 वर्ष पूर्व सुशील कुमार की इंदौर यात्रा का।

🔸 नरेन्द्र भाले 🔸
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पहलवान का मतलब कतई दादा नहीं होता। पहलवान उसे कहते हैं जो देश का नाम आसमान पर लिखता है, लेकिन उसके पैर सदैव लालमाटी में धंसे रहते हैं या फिर अंगद के पैर की तरह गद्दे पर भी मजबूती से जमे रहते हैं। यहां चर्चा हो रही है सुशील कुमार की। यथा नाम तथा व्यवहार के लिए ख्यात बजरंगबली का यह अनन्य भक्त गुरुवार को इंदौर पधार रहा है।

कारण क्या है?

ईमानदारी से कहें तो केवल उन प्रतिभाओं को उत्साहित करने के लिए जिन्होंने न केवल शहर का बल्कि प्रदेश का नाम भी देश के नक्शे पर अंकित किया है। लंदन ओलंपिक में रजत तथा बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले इस पहलवान में इतना भी शऊर नहीं है कि इस्पोरा अवार्ड समारोह के आयोजकों से चार्टर्ड प्लेन का किराया मांग ले या फिर अपने सपोर्ट स्टाफ के लिए अन्य सहूलियतें।
पहलवान होने के कारण उसने अपने मेकअप के लिए भी आयोजकों से कोई फरमाईश नहीं की। यह सरासर गलत है। बंदे को सानिया मिर्जा से कई सबक लेने की आवश्यकता है। प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान को देकर प्रदेश के खिलाडिय़ों की हौसला अफजाई का जिम्मा सानिया को सौंपा गया था, लेकिन परायों के दम पर इतराने वाली इस पाकिस्तानी बहू ने इस अलंकरण में अपनी शर्तों पर आने से मना कर दिया। मुद्दा जो भी रहा हो, खेल मंत्री तथा सानिया के बयान कतई मेल नहीं खाते थे। यदि टेनिस में व्यक्तिगत एकल मुकाबले की बात की जाए तो सानिया अंतर्राष्ट्रीय पटल पर जीरो बटे सन्नाटा है, लेकिन युगल या मिश्रित युगल की बात की जाए तो पराए कंधों पर त्यौहार मनाना कोई इस ‘बहू’ से सीखे।वापस सुशील पर लौटते हैं। बंदे ने 1952 का इतिहास दोहराते हुए खशाबा जाधव की तर्ज पर कांस्य पदक जीता। सतपाल पहलवान के इस गुणी शिष्य ने लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीकर एक बार फिर भारत का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। इसके बाद तो चारों तरफ से सुशील पर पैसे की बरसात होने लगी।
दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के गांव बापरोली में 1982 में जन्मे कुश्ती के इस दिवाने ने आज तक कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं जिसकी कल्पना हर पहलवान करता है, लेकिन उसे साकार किया केवल सुशील ने। नौकरी में रेलवे की यह बोगी वास्तव में इंजन के आगे चल रही है। ऐसे हुनजरबाज का मां अहिल्या की नगरी में दिल से स्वागत है एवं इंदौर टेनिस क्लब में उनके पाक हाथों से नवाजे जाने वाले महक जैन, आशिया पटेल, सुदीप्ति हजेला, मेघना उपाध्याय तथा परम बिरथरे निश्चित ही कुछ कर गुजरने की प्रेरणा लेंगे सुशील से। इस्पोरा अर्थात इंदौर स्पोर्ट्स राइटर्स एसोसिएसन के सचिव विकास पांडे बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने सुशील पहलवान का इस कार्यक्रम के लिए चयन कर इंदौर ही नहीं बल्कि प्रदेश का भी मान बढ़ाया।

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