स्वर प्रवाह की पहली सुरमयी पेशकश से नए साल का अभिषेक

  
Last Updated:  January 10, 2021 " 07:29 pm"

इंदौर : कोरोना काल ने लोगों को लंबे समय तक चारदीवारी में कैद रहने पर मजबूर कर दिया था। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लोग जैसे भूल ही गए थे कि कला और संस्कृति भी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसके बिना जिंदगी रंगहीन सी हो जाती है। खैर, वक्त बीतने के साथ कोरोना का खतरा कम होने लगा तो अब गीत- संगीत और अन्य सामाजिक गतिविधियों के आयोजन भी गाइडलाइन का पालन करते हुए होने लगे हैं।इसी कड़ी में सांस्कृतिक संचालनालय, मप्र शासन की सहभागिता के साथ
संस्था पंचम निषाद और इंदौर प्रेस क्लब के संयुक्त मासिक उपक्रम ‘स्वर प्रवाह’ की नए वर्ष में पहली प्रत्यक्ष पेशकश से रूबरू होने का अवसर रसिक श्रोताओं को मिला।
रविवार (10 जनवरी) को इंदौर प्रेस क्लब के राजेन्द्र माथुर सभागार में सजाई गई गायन- वादन की महफ़िल में आए श्रोताओं ने भी आज्ञाकारी बच्चों की तरह कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए महफ़िल का आनंद लिया। कार्यक्रम के पूर्व समूचे हॉल को भी सेनिटाइज किया गया।
बीते दो दिन से बिगड़े मौसम के मिजाज में भी रविवार को तब्दीली देखने को मिली। हल्की धूप के साथ ठंड का असर भी कम होने से रसिक श्रोताओं की उपस्थिति कार्यक्रम में अच्छी रही।
कार्यक्रम का आगाज नन्हीं कलाकार पवित्रा कसेरा के संतूर वादन से हुआ।पवित्रा ने छोटी उम्र होने के बावजूद अपने हुनर से श्रोताओं की खूब दाद बटोरी। उन्होंने संतूर पर राग भैरव में आलाप व जोड़ के बाद एक बंदिश ‘जागो मोहन प्यारे’ बजाई। तबले पर मुकेश रासगाया ने पवित्रा का बखूबी साथ निभाया।

पवित्रा के बाद मंच संभाला मुम्बई से आए गायक कलाकार रमाकांत गायकवाड़ ने। उल्हास राजहंस जैसे तबले के जादूगर और विवेक बंसोड़ जैसे हारमोनियम वादक का साथ मिलने से रमाकांत के गायन को वो धार मिल गई जिसकी चाहत हर कलाकार को होती है। उन्होनें राग मिया की तोड़ी में पारंपरिक बंदिश ‘अब मोरे राम, विराम’ की प्रस्तुति से अपने गायन की शुरुआत की। यह बंदिश विलम्बित एकताल में निबद्ध थी। कहा जाता है कि उनके गायन में पंडित जगदीश प्रसाद की गायकी की झलक मिलती है। बहरहाल, इसी राग में रमाकांत ने मध्यलय त्रिताल में निबद्ध बंदिश ‘अब मोरी नैया पार करो’ पेश की। महफ़िल की रंगत को परवान चढ़ाते हुए उन्होंने दोपहर में गाया जाने वाला राग शुद्धसारंग पेश किया। इस राग में उन्होंने दो बंदिशें ‘बेग दरसवा देवो’ और ‘अब मोरी बात’ को पूरी तैयारी के साथ गाई। अंत में ठुमरी ‘याद पिया की आए’ और ‘का करू सजनी’ गाकर रमाकांत ने अपने गायन को विराम दिया। बीच- बीच में उल्हास राजहंस के तबले और विवेक बंसोड़ के हारमोनियम की जुगलबंदी ने भी श्रोताओं को आनंदित किया। तानपुरे पर थे वैभव देशपांडे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने अतिथि कलाकारों का स्वागत करने के साथ उन्हें शॉल व श्रीफल भेंट किए। कलाकारों का परिचय और कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी संजय पटेल ने निभाई। आभार शोभा चौधरी ने माना।

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