24 घंटे के संगीत अनुष्ठान का शोभा चौधरी ने किया सुरमयी आगाज

  
Last Updated:  June 21, 2019 " 09:56 am"

इंदौर: संगीत ईश्वर का दिया वो वरदान है जो इंसान के तन- मन को खुशियों से भर देता है। ये संगीत का ही जादू है कि उसके कानों में पड़ते ही हर व्यक्ति झूमने पर मजबूर हो जाता है। ये वो औषधि है जो बीमारी से लड़ने की ताकत देती है। देखा जाए तो जिंदगी के हर पल में संगीत है। नदियों की कल- कल में संगीत है। हवा की सरसराहट में संगीत है। झरने के शोर में संगीत है। कोयल की कुक, पक्षियों की चहचहाट में संगीत है। ईश्वर की भक्ति, मन में उमंग और दिल को सुकून देने वाला संगीत है। संगीत जाति, धर्म, भाषा, प्रांत और देश की सीमाओं से परे है। इसमें वो ताक़त है जो दुनिया को एक सूत्र में जोड़ती है।। यही कारण है कि विश्वभर में 21 जून को संगीत दिवस मनाया जाता है। 1982 में फ्रांस में इसकी शुरुआत हुई।
संगीत दिवस को ‘फेटे डी ला म्यूजिक ‘ के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है म्यूजिक फेस्टिवल। इसको मनाने का उद्देश्य संगीत के प्रचार- प्रसार के साथ नए- पुराने कलाकारों को एक मंच पर लाना है।
शुक्रवार { 21जून } को देश और दुनिया के साथ इंदौर में भी विश्व संगीत दिवस गाजे- बाजे के साथ मनाया गया। करीने से सजाई गई ऐतिहासिक कृष्णपुरा छत्रियों पर 24 घंटे का नॉनस्टॉप संगीत अनुष्ठान रखा गया। सुबह 6 बजे से प्रारंभ हुए इस अनुष्ठान की शुरुआत वरिष्ठ शास्त्रीय गायिका शोभा चौधरी के गायन से हुई। उन्होंने राग बैरागी भैरव में रचित बन्दिश ‘रे सुमिर ले भोर समय राजा राम को ‘ से की। ये राग पण्डित रविशंकर ने ईजाद किया है और बन्दिश पण्डित सीआर व्यास की है। झपताल में निबद्ध इस बन्दिश के बाद शोभाजी ने इसी राग में एक और बन्दिश ‘रे सांवरिया घर नहीं आये ‘ पेश की। सुबह की बेला में चल रही मन्द हवा भी शोभाजी के गायन से सुरमयी होकर बह रही थी। अपने गायन के सफर को आगे बढाते हुए शोभा चौधरी ने पंडित रविशंकर के ही रचित राग परमेश्वरी में बन्दिश गाई। इसके बाद शोभाजी ने निर्गुणी भजन ‘माया महाठगिनी हम जानी ‘ और दादरा ‘शाम मोहे नजरिया लग जाएगी’ गाकर अपनी गायकी को विराम दिया। तबले पर उनका साथ दे रहे हितेंद्र दीक्षित ने भी अपने वादन की दक्षता से श्रोताओं की सराहना पाई। शोभाजी की सुरीली शुरुआत के बाद शहर के कलाकार एक के बाद एक मंच पर आकर संगीत के इस अनुष्ठान में अपनी आहुति दे रहे हैं। संगीत प्रेमी भी इस अनुष्ठान में सहभागी होकर गायन- वादन का लुत्फ उठा रहे हैं। ये सिलसिला शनिवार सुबह 6 बजे तक अनवरत चलता रहेगा।

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