लोगों को केंद्रीय बजट से है ढेरों उम्मीदें..!

  
Last Updated:  Friday, January 31, 2020  "03:12 pm"

इंदौर : आर्थिक सुस्ती और गिरती विकास दर के बीच केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में शनिवार 1फरवरी को बजट पेश करने जा रहीं हैं। उम्मीदों के बोझ तले दबी वित्तमंत्री के समक्ष व अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ लोगों की आकांक्षाओं पर खरा उतरने की भी चुनौती है। हमने अलग- अलग क्षेत्र के लोगों से चर्चा कर यह जानने का प्रयास किया कि आम बजट से उनकी अपेक्षाएं क्या हैं।
वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा का कहना है कि वित्तमंत्री के सामने बिगड़े आर्थिक हालात को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। देखना होगा कि वे बजट में इसके लिए क्या कदम उठाती हैं। जहां तक अपेक्षाओं की बात है, बजट में महंगाई को नियंत्रित करने, पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दामों पर लगाम कसने, उद्योगों को प्रोत्साहित करने, रोजगार के अवसर बढाने और गोल्ड के आयात पर शुल्क कम करने की जरूरत है।

जीएसटी का हो सरलीकरण।

संस्कृतिकर्मी और ऐड एजेंसी के संचालक संजय पटेल का कहना है कि व्यापारी वर्ग जीएसटी के जाल में बुरीतरह उलझ गया है। वह अपना कारोबार छोड़ जीएसटी की प्रक्रिया में ही उलझने को मजबूर है। ऊपर से सीए को मोटी फीस चुकाना उसकी मजबूरी बन गई है। वित्तमंत्री निर्मलाजी को चाहिए कि जीएसटी की कागजी प्रक्रिया को छोटा करने के साथ उसका सरलीकरण करें ताकि छोटे व्यापारियों की परेशानी दूर हो सकें।

बेरोजगारी कम करने के उपाय करें।

इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया से जुड़े पत्रकार आशीष जोशी का कहना है कि वर्तमान में आर्थिक सुस्ती और बेरोजगारी ये दो बड़े संकट देश के सामने हैं। पीएम मोदी को चाहिए कि जिसतरह उन्होंने कानूनों में सुधार को लेकर कड़े फैसले लिए हैं, वैसे ही फैसले वे अर्थव्यवस्था में जान फूंकने और बेरोजगारी को दूर करने के लिए भी लें।

मध्यम वर्ग के लिए राहत भरा हो बजट।

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील धर्माधिकारी का कहना है कि मध्यम वर्ग हमेशा से उपेक्षित रहता आया है। बजट में इस वर्ग की आवश्यकताओं को ध्यान मे रखा जाना चाहिए । शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आयकर में इस वर्ग को राहत दी जानी चाहिए।
आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने की मांग भी श्री धर्माधिकारी ने की।

असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन में हो बढ़ोतरी।

कवि, लेखिका और शिक्षिका राज राजेश्वरी ने असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पेंशन की न्यूनतम सीमा बढाकर 5 हजार करने, प्रायवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए भी पेंशन का प्रावधान करने पर बल दिया है। उन्होंने आयकर छूट की सीमा बढाने, घरेलू गैस के दाम घटाने, किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने पर भी जोर दिया है।
कुल मिलाकर लोग चाहते हैं कि महंगाई पर नियंत्रण पाया जाए, रोजगार के अवसर बढ़ें और आयकर छूट की सीमा इतनी बढ़ाई जाए कि मिडिल क्लास को राहत मिल सकें। अब लोगों की आकांक्षा, अपेक्षाओं पर बजट कितना खरा उतरता है, ये देखना दिलचस्प होगा।

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