कृषि को उद्योग का दर्जा देने के हिमायती थे डॉ.अम्बेडकर

  
Last Updated:  Monday, March 16, 2020  "01:52 pm"

इंदौर : सोशल मीडिया पर ब्लॉग लिखने का चलन काफी बढ़ गया है। ब्लॉगर अपनी रुचि और पसंद के अनुरूप ब्लॉग लिखकर लोगों तक पहुंचा रहे हैं। अब तो ब्लॉगर्स के संगठन भी बनने लगे हैं। इसी कड़ी में गठित ब्लॉगर्स अलायंस ने इंदौर प्रेस क्लब के सहयोग से दो दिवसीय ‘नेशनल ब्लॉगर्स समिट- 2020’ का आयोजन प्रेस क्लब के सभागार में किया है। सोमवार (16 मार्च) को ‘ब्लॉगर्स समिट’ शुभारम्भ वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल, प्रेस आयोग के सदस्य जयशंकर गुप्त और एडिटर्स गिल्ड के पूर्व महासचिव प्रकाश दुबे के आतिथ्य में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बाद में ‘अर्थशास्त्री डॉ. भीमराव अम्बेडकर’ विषय पर अतिथि वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

मूलतः अर्थशास्त्री थे बाबासाहब।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने कहा डॉ . बाबासाहब अम्बेडकर मूलतः अर्थशास्त्री थे पर उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के इस पहलू की जानकारी बहुत कम लोगों को है। 1930 में आई वैश्विक मंदी में ब्रिटेन की हालत पतली हो गई थी, तब उससे उबरने के लिए ब्रिटेन ने बाबासाहब के आर्थिक चिंतन को ही अपनाया था। आर्थिक उदारीकरण की सोच डॉ. अम्बेडकर की ही थी।कृषि को उद्योग का दर्जा देने के वे हिमायती थे। सरकारी उपक्रमों के जरिये औद्योगिकरण का विचार उन्होंने ही दिया था। RBI का गठन बाबासाहब की सिफारिश पर ही हुआ था। यही नहीं भूमि सुधार कानून भी उन्हीं के प्रयासों से बना।

राजनीतिज्ञ नहीं होते तो बड़े अर्थशास्त्री होते डॉ. अंबेडकर।

प्रेस आयोग के सदस्य जयशंकर गुप्त ने कहा कि बाबासाहब अम्बेडकर राजनीतिज्ञ नहीं होते तो बड़े अर्थशास्त्री के बतौर उनकी पहचान होती। समाज व्यवस्था को बदलने के संघर्ष में उनका आर्थिक चिंतन वाला पक्ष दबकर रह गया। वे मानते थे कि जातिवाद के खात्मे के बगैर आर्थिक असमानता दूर होने के कोई मायने नहीं हैं। अम्बेडकर के आर्थिक चिंतन को अगर किसी ने समझा तो वे लोहिया थे। जयशंकर गुप्त ने वर्तमान समय में देश की जीडीपी में आई गिरावट का जिक्र करते हुए बीजेपी और आरएसएस पर भी तंज कसा। उनका कहना था कि राष्ट्रवाद की बात करने वाले आरएसएस के चिंतन में आर्थिक चिंतन कहीं नजर नहीं आता।

गांधी और अम्बेडकर के आर्थिक नजरिये में था फर्क।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व महासचिव प्रकाश दुबे ने कहा आर्थिक चिंतन के मामले में गांधी और अम्बेडकर की सोच अलग- अलग थी। वे शहर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अलग मानकर उसी के अनुरूप कदम उठाने पर जोर देते थे। वे चाहते थे कि भूमिहीनों को भूमि का हक मिलना चाहिए। वंचित वर्ग को आर्थिक रूप से मजबूती देने के लिए उन्होंने मजदूर आंदोलन खड़ा किया था।

उदघाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकि सत्रों के जरिये ब्लॉगर्स के बीच संवाद को बढ़ावा दिया गया।।

दो दिवसीय इस ब्लॉगर्स समिट में मुम्बई, दिल्ली, भोपाल, रायपुर, बुन्देलखण्ड सहित देश के अन्य स्थानों से आए ब्लॉगर्स भाग ले रहे हैं।

प्रारम्भ में वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने स्वागत भाषण दिया और ब्लॉगर्स समिट की रूपरेखा पेश की। कार्यक्रम का संचालन श्रुति अग्रवाल ने किया। आभार इंदौर प्रेस क्लब के महासचिव हेमंत शर्मा ने माना। कोरोना से बचाव के लिए समिट में भागीदारी जता रहे अतिथियों और ब्लॉगर्स के हाथों को सेनिटाइज करने के साथ उन्हें मास्क भी वितरित किये गए।

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