सांध्य दैनिक पर पुलिस का छापा प्रजातन्त्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है

  
Last Updated:  Sunday, December 1, 2019  "06:39 pm"

इंदौर : इन्दौर प्रेस क्लब की प्रबंधकारिणी ने रविवार सुबह आपात बैठक बुलाकर शनिवार रात पुलिस द्वारा सांध्य दैनिक संझा लोकस्वामी के कार्यालय पर मारे गये छापे, दफ्तर को सील करने, संस्था के पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा वहां कवरेज के लिये पहुंचे पत्रकार साथियों के साथ मारपीट की कड़ी निंदा की । बैठक में सभी ने एक राय से कहा कि हम इस मामले में लोकस्वामी परिवार के साथ हैं। पुलिस के इस कायराना कृत्य की जितनी निंदा की जाये, कम है।

लादे गए मामले वापस लेने व दफ्तर की सील खोलने की मांग।

प्रबंधकारिणी समिति ने जितेन्द्र सोनी एवं उनके पुत्र अमित सोनी पर दर्ज प्रकरण तुरंत प्रभाव से वापस लेने तथा संझा लोकस्वामी कार्यालय पर लगाई गई सील तत्काल हटाने की मांग की है।

पुलिस की कार्रवाई प्रजातन्त्र के चौथे स्तंभ पर हमला।

इंदौर प्रेस क्लब की प्रबंधकारिणी ने पुलिस के इस कृत्य को प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना है।
प्रबंधकारिणी ने इस बारे में एक प्रस्ताव पारित कर प्रेस की आजादी में भरोसा रखने वाले संगठनों से आग्रह किया है कि वे भी इस मामले में प्रेस क्लब के साथ खडे होकर अपना समर्थन व्यक्त करें। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ, एम.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के साथ ही धार, खरगोन, मंदसौर, महू, देपालपुर सहित प्रदेशभर के प्रेस संगठनों तथा वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि, लोकस्वामी प्रेस पर छापा और पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किसी एक संस्था नही वरन संपूर्ण पत्रकारिता जगत पर हमला है। यह कार्रवाई आपातकाल की याद दिला रही है।

पत्रकार साथियों ने जताया पुरजोर विरोध।

प्रेस क्लब प्रबंधकारिणी की बैठक के बाद, प्रेस क्लब में ही हुई पत्रकार साथियों की बैठक में भी इस मुद्दे पर विचार विमर्श कर आगे के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा हुई। पत्रकारों में पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर गहरा आक्रोश देखा गया। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना था कि संझा लोकस्वामी पर छापे की ये कार्रवाई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को धमकाने का प्रयास है। कार्रवाई क्यों और किसके इशारे पर की गई कोई बताने को तैयार नहीं था। अधिकारी अखबार का दफ्तर सील करने को लेकर झूठ बोलते रहे। जीतू सोनी और उनके बेटे पर फर्जी प्रकरण लादे जा रहे हैं ताकि कोई सच लिखने का सांहस न कर सके। पुलिस की कार्रवाई का कवरेज कर रहे फ़ोटो और वीडियोग्राफरों के कैमरे तक छीन लिए गए और उनसे बदसलूकी की गई।

आपातकाल से भी घृणित मामला।

पत्रकार साथियों ने संझा लोकस्वामी पर पुलिसिया कार्रवाई और पत्रकारों के साथ पुलिस की बर्बरता को आपातकाल के दौरान की गई ज्यादती से भी बढ़कर बताया। उनका कहना था कि पुलिस की कार्रवाई घृणा के योग्य है और इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
इस दौरान तय हुआ कि प्रेस क्लब का एक प्रतिनिधि मण्डल महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज करवायेगा वहीं प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी समूचे घटनाक्रम से अवगत कराया जाएगा।

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