सेवा कुंज अस्पताल से सरकार के दबाव में हटाया गया ऑक्सीजन प्लांट, विधायक शुक्ला ने लगाया आरोप

  
Last Updated:  Sunday, April 25, 2021  "07:01 pm"

इंदौर : कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार ने रातों-रात कनाडिया रोड स्थित सेवा कुंज अस्पताल के परिसर से ऑक्सीजन का प्लांट हटवा दिया है। इस प्लांट को इस मकसद से हटवाया गया है ताकि इस अस्पताल में 300 मरीजों का इलाज होने का रास्ता रोका जा सके । इंदौर के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट के निर्वाचन क्षेत्र का अस्पताल होने के बावजूद उन्होंने इस अस्पताल कोविड मरीजों के उपचार का केंद्र नहीं बनने दिया।

शुक्ला ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि पिछले कई दिनों से हम मांग कर रहे थे कि कनाडिया रोड के इस अस्पताल को कोरोना के संक्रमित मरीजों के उपचार का केंद्र बनाया जाए । इस अस्पताल में बेड के साथ ही डॉक्टर , नर्स , पैरामेडिकल स्टाफ सहित सारी सुविधाएं हैं । इस अस्पताल को जानबूझकर मरीजों का उपचार का केंद्र नहीं बनने दिया जा रहा था। इस मामले को लेकर मेरे द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट अपने निर्वाचन क्षेत्र स्थित इस अस्पताल का दौरा करने भी गए थे । मंत्री डॉ उषा ठाकुर ने भी इस अस्पताल का दौरा किया था । दोनों मंत्रियों ने दिखावे के लिए तो यह ऐलान किया कि इस अस्पताल को जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा लेकिन अब तो उनकी मंशा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

सरकार ने दबाव बनाकर हटवाया ऑक्सीजन प्लांट।

विधायक शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार ने दबाव बनाकर इस अस्पताल में लगा हुआ ऑक्सीजन प्लांट हटवा दिया। इससे गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों के उपचार का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर के प्रभारी मंत्री सिलावट सांवेर में तो 100 बिस्तर का अस्पताल खोलने की बात करते हैं लेकिन 300 बिस्तर के अस्पताल में इलाज शुरू करवाने की बजाय उसपर ताले लटकवाने की कवायद में जुटे हैं।

विजयवर्गीय ने दिए थे अस्पताल को चालू करने के निर्देश।

शुक्ला ने कहा कि उन्होंने द्वारा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से चर्चा कर उन्हें भी सेवा कुंज अस्पताल के बारे में जानकारी दी थी। विजयवर्गीय ने अधिकारियों की बैठक लेकर इस अस्पताल को चालू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी यहां से ऑक्सीजन प्लांट हटवाकर इस अस्पताल को चालू करने की संभावना पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है। ऐसा करके शासन- प्रशासन ने कोरोना पीड़ितों के साथ अन्याय किया है।

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