स्कूल खोलने का अंतिम निर्णय अब क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियां लेंगी- सीएम

  
Last Updated:  Wednesday, July 21, 2021  "06:24 am"

भोपाल : 26 जुलाई से 11 वी और 12 वी की कक्षाएं खोंलने के मामले में प्रदेश सरकार ने फैसला आपदा प्रबंधन कमेटियों पर छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कोरोना की स्थिति और आगामी तैयारियों की समीक्षा बैठक में कहा कि 26 जुलाई से कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए स्कूल आरंभ करने के संबंध में अंतिम निर्णय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियां लेंगी। जिन जिलों में कोरोना वायरस का एक भी प्रकरण नहीं है वहां स्कूल संचालन आरंभ किया जा सकता है परंतु इस संबंध में क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी, जिले के प्रभारी मंत्री, जिला कलेक्टर आपसी विचार-विमर्श कर लोगों को विश्वास में लेकर शालाओं का संचालन आरंभ करें। बच्चों के स्कूल आने के लिए पालकों की सहमति आवश्यक होगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रभुराम चौधरी मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी बैठक में उपस्थित थे।
सभी जिलों के प्रभारी मंत्री तथा प्रभारी अधिकारियों ने बैठक में ऑनलाइन सहभागिता की।

स्कूलो में कोरोना गाइडलाइन का पालन आवश्यक।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 50 प्रतिशत क्षमता के साथ कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं का संचालन 26 जुलाई से आरंभ किया जाए। आरंभ में प्रयोग के रूप में एक-एक दिन शाला लगाई जाए। अगस्त माह के पहले सप्ताह से 50% क्षमता के साथ दो-दो दिन कक्षाएं लगाई जाएं। कक्षा के 50 प्रतिशत विद्यार्थी दो दिन आएं, शेष 50 प्रतिशत अगले दो दिन आएं। इस प्रकार एक सप्ताह में चार दिन स्कूल लगेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कक्षा में एक कुर्सी छोड़कर बैठना, मास्क लगाना, सैनेटाइजर का उपयोग और कोरोना अनुकूल व्यवहार का शत-प्रतिशत पालन आवश्यक होगा।

रेस्टोरेंट अब रात 11 बजे तक खोले जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि रेस्टोरेंट अब रात 11 बजे तक खोले जा सकेंगे। रात 11 से प्रात: 6 बजे का कर्फ्य जारी रहेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने समस्त प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिए कि भीड़ भरे आयोजन नहीं किए जाएं। छोटे आयोजनों की अनुमति है पर इनमें कोविड अनुकूल व्यवहार का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कोविड अनुकूल व्यवहार के पालन में बुरहानपुर में आयोजित कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि आयोजनों में इस प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत करने से जनता को कोरोना अनुकूल व्यवहार के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी औद्योगिक इकाइयां अपने यहां कार्यरत कर्मचारियों, मजदूरों का शत-प्रतिशत टीकाकरण निजी अस्पतालों में सुनिश्चित कराएं।
कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में जारी तैयारियों पर केन्द्रित इस बैठक में कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति, देश-दुनिया में संक्रमण की स्थिति को देखते हुए प्रदेश में संक्रमण की संभावना, टीकाकरण अभियान, अस्पतालों में संसाधनों को लेकर जारी तैयारी, ऑक्सीजन आपूर्ति, मानव संसाधन की उपलब्धता और प्रशिक्षण आदि पर प्रेजेंटेशन भी दिया गया।

30 सितम्बर तक आरंभ हो सभी ऑक्सीजन प्लांट।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अधिक संक्रमण वाले देशों के साथ-साथ केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर नजर रखी जाए। प्रदेश में संभाग स्तर सहित सुदूरवर्ती जिलों में कोरोना जाँच के लिए लैब विकसित की जाएं, ताकि रिपोर्ट प्राप्त करने में विलंब न हो और तत्काल आवश्यक उपचार शुरू किया जा सके। पिछले अनुभव को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन की उपलब्धता का पूर्वानुमान लगाते हुए सभी जिलों में आवश्यक क्षमता विकसित की जाए। मुख्यमंत्री चौहान ने समय रहते अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, उपकरणों व दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 30 सितम्बर तक सभी ऑक्सीजन प्लांट शुरू किए जाएं। सी.टी. स्कैन बड़ी चुनौती है, प्रदेश में इस सुविधा के विस्तार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं।

तीसरी लहर को देखते हुए अस्पताल स्तर पर सूक्ष्म नियोजन करें।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार के जिलों में अस्पतालों में जारी तैयारियों की सतत निगरानी के निर्देश दिए। अस्पतालों की क्षमता संवर्धन के कार्यों में आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने, समस्याओं के तत्काल निराकरण, उपलब्ध संसाधनों के रखरखाव पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि तीसरी लहर आने की स्थिति में मरीज किन अस्पतालों में जाएंगे, ऑक्सीजन की आपूर्ति का स्वरूप क्या होगा, आवश्यक दवाओं व सामग्री की उपलब्धता आदि का सूक्ष्म नियोजन अभी से सुनिश्चित किया जाए।

प्रदेश का रिकवरी रेट 98.6 प्रतिशत।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कोरोना के कन्फर्म केस मात्र 12 और 202 एक्टिव केस हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश 32वें नंबर पर है। प्रदेश का रिकवरी रेट 98.6 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय दर 97.3 प्रतिशत है। बैठक में अमेरिका, इंग्लेंड सहित महाराष्ट्र, केरल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक और असम में संक्रमण की स्थिति और ट्रेंड का प्रस्तुतिकरण दिया गया। जानकारी दी गई कि सितम्बर-अक्टूबर में तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की जा रही है।

18 से 44 वर्ष आयु समूह में हुआ 01 करोड़ से अधिक का टीकाकरण।

प्रदेश में 08 लाख 57 हजार 320 हेल्थ केयर वर्कर, 08 लाख 90 हजार 246 फ्रंटलाइन वर्कर, 60 वर्ष से अधिक आयु समूह के 50 लाख 66 हजार 690 व्यक्तियों, 45 से 60 वर्ष आयु समूह के 68 लाख 96 हजार 963 व्यक्तियों और 18 से 44 वर्ष आयु समूह के 01 करोड़ 14 लाख 74 हजार 334 व्यक्तियों का टीकाकरण हो चुका है। बैठक में ग्वालियर जिले में टीकाकरण वेस्टेज को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय करने और इसके लिए प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। दिसम्बर 2021 तक टीकाकरण की चरणबद्ध योजना का प्रेजेंटेशन भी दिया गया।

ऑक्सीजन बेड बढ़ाए जा रहे हैं।

तीसरी लहर की संभावनाओं को देखते हुए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, ऑक्सीजन प्रबंधन, उपकरणों और दवाओं, मानव संसाधन तथा प्रशिक्षण व उपचार व्यवस्था के संबंध में जानकारी दी गई। प्रदेश में 11 हजार 185 बेड उपलब्ध हैं और 03 हजार 63 नए ऑक्सीजन बेड स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 750 ऑक्सीजन बेड बढ़ाए जा रहे हैं।

प्रदेश में स्थापित हो रहे हैं 186 पी.एस.ए. प्लांट्स।

ऑक्सीजन के लिए 186 पी.एस.ए. प्लांट्स स्थापित किए जा रहे हैं, इनमें से 34 ने कार्य करना आरंभ कर दिया है। शेष 152 पी.एस.ए. प्लांट्स 30 सितम्बर तक आरंभ हो जाएंगे। इससे 229 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की क्षमता प्राप्त होगी। इसके साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा विभाग और जिला स्तर पर भी ऑक्सीजन प्लांट्स का कार्य जारी है, जो 30 सितम्बर तक पूर्ण होगा। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वेंटीलेटर, सी-पेप, वाय-पेप आदि की आपूर्ति भी प्रक्रिया में है।

01 हजार से अधिक स्टाफ नर्स नियुक्त।

प्रदेश में मई 2021 में 01 हजार 20 स्टाफ नर्स को नियुक्ति प्रदान की गई है। 148 रेडियोग्राफर, 248 लैब टेक्निशियन को भी नियुक्त किया गया। प्रदेश में 07 हजार 523 मेडिकल ऑफिसर, 15 हजार 999 स्टाफ नर्स, 26 हजार 301 आयुष मेडिकल ऑफिसर और 34 हजार 439 फील्ड वर्कर्स, 51 हजार 684 आशा और 14 हजार 217 ए.एन.एम. को कोविड से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

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