ओमिक्रोन की रफ्तार तेज पर घातक नहीं इसका संक्रमण, 3 से 5 दिन में ठीक हो रहे ज्यादातर मरीज- डॉ. पांडे

  
Last Updated:  Sunday, January 9, 2022  "01:45 am"

इंदौर : नए वैरिएंट ओमिक्रोन के साथ कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। नए साल 2022 के आगमन के साथ ही संक्रमण में आई तेजी बरकरार है। 7 जनवरी को 618 पॉजिटिव मिलने के बाद 8 जनवरी को भी 621 संक्रमित मिले। देखा जाए तो जनवरी के 8 दिनों में ही इंदौर में 2900 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव सामने आ चुके हैं। ये आंकड़ा कहां जाकर थमेगा कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में आगे क्या हालात हो सकते है..? किसतरह इस तीसरी लहर का मुकाबला किया जा सकता है..? ट्रीटमेंट के लेवल पर क्या तैयारी है.. ? लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए..? इसतरह के कई सवालों का जवाब जानने के लिए हमने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. वीपी पांडे से चर्चा की। डॉ. पांडे ने विस्तार से सारे सवालों का जवाब देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे घबराएं नहीं, दहशत में नहीं आएं। लक्षण दिखने पर टेस्ट कराएं, खुद को आइसोलेट करें। रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो डॉक्टर की सलाह लें।

ओमिक्रोन की रफ्तार तेज पर घातक नहीं।

डॉ. पांडे ने अवर लाइव इंडिया के साथ चर्चा में कहा कि कोई भी वायरस 4 से 6 हफ्ते में खुद को जिंदा रखने के लिए अपना रूप बदल लेता है। नया वैरिएंट ओमिक्रोन कोरोना वायरस का ऐसा ही बदला हुआ स्वरूप है। सबसे पहले ये अक्टूबर 2021 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था। वहां एक से डेढ़ माह में ही इसने लाखों लोगों को संक्रमित किया था पर वहां अब ये समाप्ति की ओर है। हमारे यहां भी इसके फैलने की रफ्तार बहुत तेज है पर राहत की बात ये है कि कोरोना का ये नया वेरिएंट पिछले डेल्टा वेरिएंट की तरह फेफड़ों को प्रभावित नहीं कर रहा है। ज्यादातर केस में यह गले तक सीमित रहता है। हल्की सी सर्दी, खांसी, खराश, सिरदर्द,बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण इसमें उभरते हैं और 3 से 5 दिन में ही साधारण उपचार से ठीक भी हो जाता है।

अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को हो सकती है परेशानी।

डॉ. पांडे ने कहा कि कोरोना का ये वायरस सामान्य लोगों के लिए घातक नहीं है पर जो लोग बीपी, डायबिटीज, किडनी, हार्ट या अन्य गंभीर किस्म की बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें जरूर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें संक्रमण होने पर थोड़ी परेशानी हो सकती है। हालांकि पिछली बार की तरह निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत होना जैसे हालात इस वेरिएंट से नहीं बन रहे हैं।

डरें नहीं, 5 दिन तक आइसोलेशन में रहें, डॉक्टरी सलाह लें।

डॉ. पांडे ने बताया कि कोरोना के इस नए वेरिएंट से डरने की या दहशत में आने की जरूरत नहीं है। जिन्हें भी सर्दी, खांसी, बुखार, सिरदर्द व कमजोरी जैसे लक्षण नजर आएं वो अपना टेस्ट करवाएं, रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो डॉक्टर की सलाह लें और आइसोलेशन में रहें। हमारे यहां आइसोलेशन की अवधि फिलहाल 7 दिन है पर विदेशों में ये अवधि 5 दिन कर दी गई है। सामान्य उपचार के जरिए 95 फीसदी संक्रमित मरीज घरों में रहकर ही 3 से 5 दिन में ठीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अनावश्यक दवाइयां न खाएं, उनका संग्रह न करें। उतनी ही दवाई लें, जितनी डॉक्टर ने आपको लेने को कहा है।

दूसरे को संक्रमित करने की क्षमता 2 दिन।

डॉ. पांडे ने कहा कि कोरोना के नए वेरिएंट से ग्रसित व्यक्ति केवल 2 दिन ही किसी अन्य को संक्रमित कर सकता है। इसके बाद इसकी संक्रमण क्षमता कम हो जाती है। अतः सावधानी रखकर हम इससे बच सकते हैं और दूसरों को भी बचा सकते हैं।

मौसम का कोरोना वायरस पर प्रभाव नहीं।

डॉ. पांडे के मुताबिक कोरोना एक अलग तरह का वायरस है। ठंड हो या गर्मी, हर मौसम में बदलते स्वरूप के साथ इसका प्रकोप देखने को मिल रहा है। अतः कहा जा सकता है कि मौसम के बदलाव का इस वायरस पर कोई प्रभाव नहीं होता।

इलाज भी हुआ बेहतर।

डॉ. पांडे ने बताया कि कोरोना को लेकर लगातार चल रहे शोध के चलते इसके इलाज में भी प्रगति हुई है। हमारे देश में डीआरडीओ ने एक दवा ईजाद की थी, वह उससमय कारगर पाई गई। इसके अलावा अमेरिका में दो और नई दवाइयां कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जा रहीं हैं। हालांकि कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन की घातकता बहुत कम होने से ज्यादा दवाइयों की जरूरत इसमें नहीं पड़ रही है।

मास्क लगाएं, टीकाकरण करवाएं।

डॉ. पांडे का कहना है कि मास्क ओमिक्रोन से बचाव का कारगर उपाय है। अतः मास्क लगाकर रखें। भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। जिन लोगों ने अभी तक टीकाकरण नहीं करवाया है वे टीका जरूर लगवा लें। फ्रंटलाइन वर्कर और 60 वर्ष की उम्र से अधिक लोग बूस्टर डोज लगवाएं। देखा गया है कि टीकाकरण कोरोना वायरस की गंभीरता को रोकने में सफल रहा है। डॉ. पांडे ने उम्मीद जताई कि कोरोना के और भी वैरिएंट आते रहेंगे पर ओमिक्रोन को देखकर कहा जा सकता है कि यह वायरस अब अपनी घातकता खोने लगा है। आनेवाले समय में इसकी संक्रमण क्षमता नहीं के बराबर रह जाएगी।

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