जीवन की सच्ची पथ प्रदर्शक है मेरी मां..

  
Last Updated:  Monday, May 9, 2022  "11:30 pm"

मेरी माँ, जो सेल्फी नहीं समझती, माँ जो बातचीत करते-करते खाना बनाती है। पता नहीं कहाँ से इतना अच्छा मापतौल कर लाती है। कोई कूकिंग का कोर्स नहीं किया पर मेरे मन को भा जाए ऐसा भोजन पकाती है। वह सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाना नहीं जानती, पर मेरे सुख-दु:ख के अकाउंट को पता नहीं कैसे तुरंत समझ जाती है। उनके पास कोई स्मार्ट फोन नहीं है फिर भी इतनी स्मार्ट है मेरी माँ जो बिना एमबीए के ही सारा मैनेजमेंट कर लेती है। काउन्सलिंग शब्द का अर्थ नहीं समझती पर पता नहीं कैसे मेरी काउन्सलिंग कर लेती है। अकाउंट और बहीखाते को नहीं जानती पर मेरे अकाउंट को खुशियों से भरना चाहती है। जिसका खुद का खुशियों का कोई खाता नहीं है पर मेरा दु:ख जिसे जरा भी भाता नहीं है।

नाम के अनुरूप है, मेरी माँ। सहज सरल भोला-भाला स्वरुप है, मेरी माँ॥

बिना छल-कपट के स्नेह जताती, मेरी माँ। इस अविश्वासी दुनिया में विश्वास बढ़ाती, मेरी माँ॥

जिसे खुद की जन्मतिथि का कोई ज्ञान नहीं पर मेरा हर बर्थडे उसके माइंड में रजिस्टर रहता है। मेरी सुख सुविधाओं के लिए वो हर पल सजग है पर खुद के सुख का जिसे भान तक नहीं है। परीक्षा मेरी होती है पर रात भर चिंता उसे रहती है। मेरे लिए खुशियों के लम्हे चुराते-चुराते वह अपना जीवन ही खत्म कर बैठी। मेरे हित और सफलता के लिए अंधविश्वासी भी बनी। कभी-कभी अपना अहम छोड़ा, अपने आप को भूलकर बस मुझ में रम गई। मेरे जन्म ने एक ऐसी माँ को जन्म दिया जो मेरे होने से खुद को भूल गई। वह तो बस मेरे होने से ही प्रफुल्लित रहती है।बीमारी की अवस्था में भी जिसका पहला प्रश्न होता है की मेरे बच्चों ने खाना खाया या नहीं। माँ की ममता बच्चों को डाँटने और मारने पर खुद प्रताड़ित होती है। वह है मेरी मासूम माँ। मेरे जीवन को सजाने-सँवारने में जो खुद सजना-सँवरना भूल गई वह है मेरी भोली-भाली माँ। मेरी खुशियों की पूँजी इकट्ठी करते-करते जिसने निरंतर स्वयं के लिए कंजूसी की मनोवृत्ति धारण की वह है मेरी भोली-भाली माँ। जिसका आशीष मुझे हर दु:ख से दूर कर देता है और जो मेरी लाख गलतियों के बाद भी पहला प्रश्न पुछती है की तूने खाना खाया की नहीं।

जीवन की सच्ची पथ प्रदर्शक है, मेरी माँ। प्रेम के अनमोल बाग की बागवान है, मेरी माँ॥

काँटो भरी दुनिया में फूलों सी कोमल है, मेरी माँ। सरल बनो ह्रदय से यही सिखाती है, मेरी माँ॥

माँ मैं कितना भाग्यशाली हूँ की इस काँटों भरी दुनिया में मुझे तेरी ममता का स्पर्श मिला है। यह स्पर्श मुझे इस दुनिया की कठोरता से बचाता है। तूफानों के बवंडर में फँसा होने के बावजूद भी तेरा मातृत्व मुझे सुरक्षा प्रदान करता है। तेरी सादगी मेरे जीवन में रंग भर देती है। तेरी सरलता मेरे जीवन की हर कठिनाई दूर कर देती है। तेरा होना मेरे लिए सुकून भरी छांव है। तुझसे तो मेरा जुड़ाव दुनिया के हर रिश्ते से नौ महीने ज्यादा है। तू ही थी वह जो मेरे आने की खुशी जानते ही खुद को भूल बैठी। मेरी भोली-भाली माँ तेरे वर्णन के लिए मैं निःशब्द हूँ। मेरे अच्छे कर्मों का प्रतिफल तेरा साकार रूप है।

सहनशीलता की सुंदर प्रतीक है, मेरी माँ। अपनत्व से सराबोर है, मेरी माँ॥

माँ के इस स्वरुप को मेरे भाग्य ने दिलाया। डॉ. रीना कहती ममत्व की पराकाष्ठा ने मेरा जीवन पूर्ण बनाया॥

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)

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