पुराने मामलों में दिए नोटिस के आयकर विभाग को बताना होंगे कारण

  
Last Updated:  Monday, June 20, 2022  "08:47 pm"

इंदौर : सीए ब्रांच एवं टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने आयकर से प्राप्त नोटिस विषय पर सेमिनार का आयोजन किया।
सेमिनार में इंदौर सीए ब्रांच के चेयरमैन आंनद जैन ने कहा की जून एवं जुलाई माह ऐसे आयकर करदाताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिन्हे कर निर्धारण वर्ष 2013-14 या उसके बाद के वर्षो के नोटिस जून 2021 के पहले मिले थे, उन पर आगे कार्रवाई होगी या नहीं यह करदाता द्वारा जून एवं जुलाई माह में दिए गए जवाब पर निर्भर करेगा l

सुप्रीम कोर्ट ने वैध ठहराए नोटिस।

मुख्य वक्ता सीए हितेश चिमनानी ने कहा की वर्ष 2021-22 के बजट में धारा 148A के तहत यह कहा गया था कि 3 साल से ज्यादा पुराने मामलों को आयकर विभाग के द्वारा नहीं खोला जा सकेगा। केवल ऐसे मामले जहाँ 50 लाख से अधिक की आय कर चोरी की आंशका होगी, 3 वर्ष से पुराने मामलों पर कार्रवाई की जाएगी l उपरोक्त संशोधन से बहुत सारे करदाताओं को पुराने वर्षो के इनकम टैक्स नोटिस से राहत मिलती नजर आयी थी लेकिन वर्ष 2020 के मार्च माह में कोविड के चलते सरकार कराधान और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश लायी थी जिसमे विभिन्न देय तिथियों को बढ़ाने का अधिकार सरकार के पास था। इस अध्यादेश के हवाले से सरकार ने आयकर के 3 वर्षो से पुराने मामलों में आयकर के नोटिस जारी करने की अंतिम तिथि जो नियमानुसार 31 मार्च 2021 को समाप्त हो गयी थी उसे बढ़ा कर 30 जून 2021 कर दिया था। आयकर विभाग ने अप्रैल 2021 से जून 2021 के बीच निर्धारण वर्ष 2013-14 से लेकर निर्धारण वर्ष 2015-16 तक के लगभग 90 हजार पुराने मामलों पर ध्यान देते हुए नोटिस जारी किये थे। इलाहाबाद, बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और राजस्थान हाईकोर्ट में इस नोटिस को चुनौती भी दी गई थी की आयकर विभाग द्वारा समय सीमा की समाप्ति के बाद भी पुराने कानून के हिसाब से नोटिस जारी किए गए हैं, जो की विधि सम्मत नहीं हैं। तमाम हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस को गलत करार दिया था। उपरोक्त मामले में आयकर विभाग ने सर्वोच्च न्यायलय का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा की अप्रैल 21 से जून 21 के मध्य जारी किए नोटिस को धारा 148ए के तहत जारी किए वैध नोटिस माना जाएगा l उपरोक्त निर्णय से पुराने नोटिस पुनः जीवित तो हो गए पर करदाता को अपने बचाव के लिए नए आयकर कानून के अंतर्गत जो लाभ दिए गए है उनसे वंचित नहीं किया जा सकताl अब आयकर अधिकारी को न्यायालय के निर्णय से 30 दिन के भीतर लिखित में उन कारणों को करदाता को बताना होगा जिसकी वजह से करदाता को नोटिस दिया गया था l यदि निर्धारण अधिकारी ने 30 दिन में कारण नहीं बताए तो ऐसे करदाताओं के विरुद्ध आयकर विभाग कार्रवाई नहीं कर सकेगा l

50 लाख से ज्यादा कर चोरी के मामलों में ही नोटिस।

सीनियर एडवोकेट सीए सुमित नेमा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुपालन में सीबीडीटी ने 11 मई 2022 को एसओपी जारी करते हुए कहा कि कर निर्धारण अधिकारी असेसमेंट ईयर 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 के सालों के नोटिस तभी जारी कर सकेगा जब इन सालों में कर अपवंचन 50 लाख से ज़्यादा हो।

करदाता को दो सप्ताह में देना होगा जवाब।

सीए शैलेन्द्र सोलंकी ने कहा की जिन करदाताओं को उपरोक्त कारण मिल गए हैं, उन्हें अपनी आपत्तियों को या अपने जवाब को 2 सप्ताह के भीतर देना होगा अन्यथा उस माह के अगले माह अंत तक अधिकारी के पास यह अधिकार होगा की वे जवाब के अभाव में कार्रवाई को आगे बढ़ा सकेंगे l

सेमिनार का संचालन सीए रजत धानुका ने किया। धन्यवाद अभिभाषण सीए अभय शर्मा ने दिया। इस अवसर पर रीजनल काउन्सिल मेम्बर सीए कीर्ति जोशी, सीए सुनील खंडेलवाल, सीए गोविंद बाबू अग्रवाल, सीए शशि धोका, सीए मौसम राठी, सीए अमितेश जैन, सीए स्वर्णिम गुप्ता सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद थे।

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