तकनीक से भी बड़ी है नैतिकता को बनाए रखने की चुनौती..

  
Last Updated:  Tuesday, May 16, 2023  "06:25 am"

शिक्षा साधन से नहीं समर्पण और त्याग से मिलती है।- हरिवंश।

ओल्ड पेंशन स्कीम पुनः लागू करने का अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा गंभीर विपरीत असर।

इंदौर : वरिष्ठ पत्रकार एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कहना है कि इस समय तकनीक में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सबसे बड़ी चुनौती है, तो वहीं दुनिया के समक्ष नैतिकता की चुनौती तकनीक से भी ज्यादा बड़ी है ।

उपसभापति हरिवंश इंदौर के जाल सभागृह में अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित 62 वी व्याख्यानमाला में ‘नए दौर की चुनौतियां’ विषय पर संबोधित कर रहे थे । यह व्याख्यान वरिष्ठ पत्रकार स्व.अभय छजलानी को समर्पित था ।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बना है बड़ी चुनौती।

उपसभापति हरिवंश ने कहा कि हमेशा से यह कहा गया है कि हमारे जीवन की पहली सांस से लेकर अंतिम सांस तक चुनौतियां ही चुनौतियां हैं ।आज की चुनौतियां असंख्य है । ऐसे में उनका निदान ढूंढना ही इतिहास बनाता है। इस समय नैतिक चुनौतियां सर्वोपरि है । जल वायु परिवर्तन, तकनीक, जनसंख्या वृद्धि, सृष्टि के समक्ष चुनौतियां लगातार आ रही हैं । इस समय तकनीक से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सामने आया है । इसे लेकर दुनियाभर में कहा जा रहा है कि लोगों को इसके माध्यम से वह समृद्धि मिलेगी जो उन्होंने कभी देखी नहीं, वहीं इसके माध्यम से वह तबाही भी होगी, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। निश्चित तौर पर ये तकनीक इस समय दुनिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। इसके साथ ही सोशल मीडिया के प्रति नई पीढ़ी का लगाव भी एक बड़ी चुनौती है ।

उन्होंने कहा कि तकनीक ने पूरे विश्व को एक गांव के रूप में तब्दील कर दिया है । 21वीं सदी की जो चुनौतियां हम सभी को नजर आ रही थी अब उससे गंभीर चुनौतियां हम लोगों के सामने आती हुई प्रतीत हो रही हैं । वर्ष 1996 में आई एक किताब में कहा गया था कि तकनीक तो नहीं लेकिन नैतिकता के हनन से दुनिया जल्दी समाप्त हो जाएगी । हमारे देश भारत की ताकत हमेशा नैतिकता ही रही है । अतीत में हमने देखा है कि भौतिक समृद्धि के बावजूद नैतिक पतन वाली सभ्यताएं जल्दी मिट गई ।
हरिवंश ने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले दिनों एक गांव में गया था तो वहां पर लोगों से बातचीत के बीच में उन्होंने बताया कि सरकार की योजना के तहत मुफ्त का सामान प्राप्त करने के लिए लाल कार्ड होना जरूरी होता है । इस लाल कार्ड के लिए सरकार ने जो पैमाने बनाए हैं तो यदि उनकी जांच हो जाए तो 80% लाल कार्ड गलत व्यक्तियों ने बनवा रखे हैं।

शिक्षा त्याग और समर्पण से आती है।

आज यह विडंबना है कि हमारे देश का नौजवान बिना मेहनत के करोड़पति बनना चाहता है।तो ऐसे में समाज कहां जाएगा ? हमें यह सोचना होगा। जब हमारे देश में स्कूल टूटे-फूटे थे तो उनसे जो पीढ़ी निकली उसने ऊंची नैतिकता के मापदंड स्थापित किए। इससे यह स्पष्ट है कि शिक्षा साधन से नहीं त्याग और समर्पण से आती है।उसी से हम नैतिक मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं । उन्होंने कई देशों की आर्थिक स्थिति और हमारे देश में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बन रहे हालात का भी उदाहरण के साथ ब्यौरा दिया।

ओल्ड पेंशन स्कीम पुनः लागू करना उचित नहीं।

उपसभापति हरिवंश ने कहा कि राजनीतिक लाभ पाने के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम पुनः लागू करने के आनेवाले समय में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अर्थव्यवस्था पर इसका विपरीत असर देखने को मिलेगा क्योंकि कई राज्यों के बजट का आधे से अधिक हिस्सा केवल पेंशन बांटने में ही खर्च हो जाएगा।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विनय छजलानी ने भी संबोधित किया । कार्यक्रम में भाग लेने के लिए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययन शाला के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में पहुंचे । अतिथि का परिचय वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक ने दिया। अतिथि स्वागत डॉ सोनाली नरगुंदे, अनिल भंडारी , प्रवीण जोशी, पराग जटाले ने किया।कार्यक्रम का संचालन हरेराम वाजपेई ने किया।उपसभापति हरिवंश को स्मृति चिन्ह प्रकाश हिंदुस्तानी, बृजभूषण चतुर्वेदी ने भेंट किए। अंत में आभार प्रदर्शन गौतम कोठारी ने किया।

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