सांसद शंकर लालवानी ने दिया प्रेजेंटेशन।
प्रबुद्धजनों से लिए सुझाव।
इंदौर : आत्मनिर्भर, समावेशी और टिकाऊ विकास का मॉडल बनाने को लेकर सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में “इंदौर 2030 – जीडीपी डबल करने का ब्लूप्रिंट” पर सार्थक संवाद किया गया। इस महती बैठक में उद्योगपति, अर्थशास्त्री, समाजसेवी और युवा शामिल हुए। मक़सद था: 2030 तक इंदौर को भारत के टॉप 10 आर्थिक शहरों में शामिल करना।
बैठक में सांसद शंकर लालवानी ने डेटा-बेस्ड पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। एक अनुभवी CEO की तरह उन्होंने इंदौर के भविष्य की तस्वीर रखी सामने रखी। इसके तहत GDP को दोगुना करने की रणनीति, फार्मा, EV, स्टार्टअप, टेक्सटाइल जैसे 5 प्रमुख सेक्टर,
इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की मजबूती, इनोवेशन और ग्रीन इकोनॉमी का रोड मैप पेश किया गया।
सांसद लालवानी ने कहा कि विकसित भारत का जो सपना प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाया है, और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिस गति से काम कर रहे हैं, इंदौर भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ेगा। यह रोडमैप कागज़ तक नहीं रहेगा, इसे ज़मीन पर जनता की भागीदारी से उतारा जाएगा।
चेंबर और विशेषज्ञों ने रखे सुझाव।
मालवा चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से वरिष्ठ समाजसेवी अशोक बड़जात्या और सर्विस सेक्टर की जीडीपी में भूमिका पर अर्पित बड़जात्या ने भी एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अजीत सिंह नारंग के स्वागत भाषण से हुई। सरल भाषा में उन्होंने समझाया कि इंदौर GDP कैसे डबल कर सकता है। उन्होंने लोकल इंडस्ट्री को एक्सपोर्ट से जोड़ना,युवाओं के स्किल्स को डिमांड से मैच करना, डिजिटल ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक इकोसिस्टम बनाना जैसे सुझाव उन्होंने सामने रखे।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. जयंतीलाल भंडारी ने सांसद लालवानी के विजन को “नीति निर्माण का मॉडल” बताया। उन्होंने कहा कि
कोई भी शहर तभी आगे बढ़ता है, जब उसकी योजनाएं कागज़ से निकलकर ज़मीन पर उतरें और वो जनता के साथ बनें।
प्रसिद्ध उद्योगपति शिवसिंह मेहता ने ज़ोर दिया कि इंदौर के लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना होगा। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाना और उत्पादकता व गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
GN शर्मा ने कहा कि इंदौर की आत्मा में वो ऊर्जा है, जो सपनों को हकीकत बना सकती है। बस ज़रूरत है, सब मिलकर एक दिशा में चलने की।
मालवा चैंबर्स ने 5 ट्रांसफॉर्मेशनल पिलर्स का सुझाव दिया : हर वर्ग की आय बढ़े, समावेशी विकास, स्किल-बेस्ड लर्निंग, बेहतर प्रशासनिक सिस्टम, टिकाऊ और आधुनिक विकास। इन सभी बिंदुओं को स्लाइड्स, आंकड़ों और विज़न स्टेटमेंट के ज़रिए समझाया गया।
ये प्रबुद्धजन रहे मौजूद।
शिवसिंह मेहता, डॉ. अनिल भंडारी, वल्लभ पटेल, जी.एन. शर्मा, गौतम कोठारी, प्रमोद डाफरिया, हिमांशु शाह, सुरेश हरियाणी, अशोक कोठारी, दिलीप देव, विनय कालानी, ओम नरेड़ा, सतीश मित्तल, डॉ. मकरंद शर्मा, ईश्वर बाहेती, मोहम्मद पूजावाला, आमिर इंजीनियरवाला, विशाल गिदवानी, ई. दिलीप शर्मा सहित कई अन्य उद्योगपति और विचारक।









