मीडिया के समक्ष विश्वसनीयता का संकट सबसे बड़ी चुनौती- नरहरि
इंदौर: अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला में बुधवार को ख्यात टीवी जर्नलिस्ट पुण्य प्रसून वाजपेयी को वक़्ता के बतौर बोलना था पर एक दिन पहले उनके नहीं आने की सूचना आयोजकों को मिली। वे क्यों नहीं आए ये तो पता नहीं पर हर्ष मंदर और गौहर रजा की तरह वे भी मोदी फोबिया से ग्रसित जरूर हैं। अतः वे आते तो निशाने पर मोदी ही होते इसमें कोई संदेह नहीं था। बहरहाल,पुण्य प्रसुनजी के इनकार के बाद नए वक़्ता की तलाश और पढ़े











