Category Archives: मेरे विचार

तिब्बत को स्वतंत्र देश के रूप में पहचान देगा अमेरिका..? भारत की दृष्टि से भी अहम होगा यूएसए का ये कदम

Last Updated:  Saturday, June 6, 2020  11:15 am

*कीर्ति कापसे* अमेरिका और चीन में जो विवाद चलता आ रहा है उसने अब एक नया मोड़ ले लिया है ।अमेरिका ने एक बिल पेश किया है जिसमें कहा गया है कि तिब्बत को एक स्वतंत्र क्षेत्र मान लिया जाय। जिससे तिब्बत को स्वतंत्रत देश के रूप में पहचान मिल सके।आपको याद होगा तिब्बत चीन का ऑटोनामस राज्य है ।यदि अमेरिका में यह बिल पास हो जाता है तो ये तिब्बत के लिए बहुत बडी घटना होगी।केवल यही नहीं इस और पढ़े

इंदौर के सबसे लोकप्रिय कलेक्टरों में गिने जाते थे अजित जोगी..!

Last Updated:  Saturday, May 30, 2020  2:26 pm

कीर्ति राणा/89897-89896 इंदौर: कलेक्टरों में सर्वाधिक लोकप्रिय कलेक्टर हुए नरेश नारद और उनकी ही तरह अजित जोगी भी शहर से गांवों तक लोकप्रिय रहे।ऐसा नहीं कि इनके बाद कलेक्टर नहीं आए पर इन के कार्य-व्यवहार की तरह उतने फेमस नहीं हो सके। कलेक्टर से सीधे बनें सांसद..! भारतीय राजनीति में किसी आयएएस के राज्यसभा सदस्य बनने का इतिहास भी इंदौर के नाम ही दर्ज है। मप्र में तब मुख्यमंत्री थे मोतीलाल वोरा, केंद्रीय मंत्री हुआ करते थे अर्जुन सिंह। सिंह और पढ़े

‘नाथ’ पिता- पुत्र ने छिंदवाड़ा को भी कर दिया अनाथ..!

Last Updated:  Wednesday, May 20, 2020  1:15 pm

*गोविन्द मालू* खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविन्द मालू ने छिंदवाड़ा में नाथ पिता पुत्र की गुमशुदगी के पोस्टर को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर पलटवार किया है। श्री मालू ने कहा कि कमलनाथ और नकुलनाथ अभी शासन की बागडोर नहीं सम्भाल रह,े वे जनप्रतिनिधि हैं। उन्हें अपने दायित्व से विमुख नहीं होना चाहिए।वे कोई चमत्कारी पुरुष, अन्तर्यामी या भगवान नहीं हैं जो दूर बैठकर ही जनता का दुःख- दर्द समझ किसी चमत्कार से उसे दूर कर देंगे। जिस तरह और पढ़े

प्रवासी मजदूरों की मदद में तरुण मंच ने भी निभाई अग्रणी भूमिका

Last Updated:  Wednesday,   11:17 am

इंदौर : ( सुनील धर्माधिकारी) मुम्बई, पुणे, सूरत जैसे शहरों से उत्तरप्रदेश, बिहार जैसे दूरस्थ प्रदेशों में स्थित अपने घरों को लौट रहे मजदूर और उनके परिवार के सदस्य अचंभित हो जाते हैं बायपास पर इंदौर शहर की सीमा में प्रवेश करते ही जब उन्हें अलसुबह तरुण मंच के सदस्य सड़कों पर खड़े दिखते हैं, हाथ में बिस्किट, ब्रेड, दूध के पैकेट और पानी की बोतल लिए । ये मजदूर सोचते हैं हमारी तो मजबूरी है दिन रात सफर करते और पढ़े

लॉक डाउन में मरना भी कोई मरना है लल्लू..?

Last Updated:  Tuesday, May 19, 2020  7:01 am

इन्दोरी चलन पर लिखी इस रचना का उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाना ना होकर मनोरंजन मात्र है। भाषा की अशुद्धियाँ भी जानी बूझी स्थानीय बोली अनुसार है। इन्दोरी पठ्ठा, [ जी ठीक पहचाना आपने। हर इन्दोरी किसी ना किसी का पठ्ठा अवश्य ही होता है ] बाकि सब सहन कर सकता है लेकिन अकेला रहना उसे किसी हालत में मंज़ूर नि। और इसीलिए करेला और नीम चढ़ा की तर्ज़ पर, कोरोना और लॉक डाउन वाला, उसे किसी कीमत और पढ़े

दद्दाजी भी पार्थिव शिवलिंग हो गए..

Last Updated:  Monday, May 18, 2020  12:11 pm

🔹कीर्ति राणा/89897-89896 गृहस्थ संत शायद इसीलिए कहा जाता है कि इस श्रेणी वाले संत घर-गृहस्थी के साथ धर्म-कर्म की राह पर चलते रहते हैं।कबीर, तुकाराम आदि संत इसी परंपरा के तो रहे हैं।सिंहस्थ के दौरान ही दद्दाजी से मुलाकात हुई थी। जब तक नहीं मिला तब तक उनका पार्थिव शिवलिंग निर्माण वाला आयोजन कुछ अटपटा लगता था। जिस दिन मुलाकात को गया, वहां दर्शन करने वालों का हुजूम था। कुछ देर इंतजार करना पड़ा तो उतने वक्त मैं भी उन और पढ़े

बास्केटबॉल को बढ़ावा देने में ताउम्र जुटे रहे भूपेंद्र बंडी..

Last Updated:  Sunday, May 17, 2020  9:44 am

इंदौर :(राजेन्द्र कोपरगांवकर ) बास्केटबॉल ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी भूपेंद्र बंडी को भी कोरोना के क्रूर पंजों ने हमसे छीन लिया। बताया जाता है कि वे चोइथराम अस्पताल में भर्ती थे, वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। शहर में उनके चाहने वाले सैकड़ों हैं पर विधि की विडंबना देखिये की ताउम्र बास्केटबॉल को समर्पित रहे इस कर्मवीर योद्धा को अंतिम विदाई देने के लिए भी कोई जा नहीं पाया। भूपेंद्र बंडी वो शख्सियत थे जो खुद बास्केटबॉल के राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे और पढ़े

इंदौरियों ने बता दिया वे पीड़ित मानवता के आंसू पोंछने में भी नम्बर वन हैं..

Last Updated:  Saturday, May 16, 2020  2:55 pm

इंदौर : (राजेंद्र कॉपरगांवकर) बीते कुछ दिनों से मीडिया का हर माध्यम प्रवासी मजदूरों से जुड़ी खबरों से भरा पड़ा है। खासकर महाराष्ट्र व गुजरात से छोटे- छोटे बच्चों के साथ चिलचिलाती धूप में हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए पैदल निकल पड़े इन हजारों मजदूरों की पीड़ा वाकई द्रवित करने वाली थी। यूपी, बिहार के ये मजदूर मुम्बई, नासिक सहित महाराष्ट्र व गुजरात के बड़े शहरों में मजदूरी करते थे। कोरोना संक्रमण के चलते किये गए लॉकडाउन के और पढ़े

पीड़ित मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण पेश कर रहें समाजसेवी संगठन..

Last Updated:  Friday, May 15, 2020  11:49 am

इंदौर :(राजेन्द्र कोपरगांवकर) कोरोना महामारी ने जबसे देश और दुनिया में पैर पसारें हैं, इंदौर भी इसकी चपेट में आ गया है। रेड जोन में होने के कारण लॉकडाउन व कर्फ्यू के साथ कड़े प्रतिबंधों की मार झेल रहे इस शहर में बीते 51 दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है। मप्र की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इस शहर में तमाम आर्थिक गतिविधियां ठप हैं। कल कारखाने, बाजार, मॉल्स, सिनेमाघर, लोकल ट्रांसपोर्ट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, सबकुछ बन्द है। और पढ़े

घर जाने के लिए मजदूरों को हजारों किलोमीटर पदयात्रा करनीं पड़े, ये कौनसा भारत है..?

Last Updated:  Tuesday, May 12, 2020  7:43 am

कीर्ति राणा इंदौर : रात तक इकट्ठे हुए जूठे बर्तन मांजने के लिए रख दिए थे। सुबह बर्तन साफ करने के लिए बैठा तो जूठन लगे बर्तनों पर लाल चीटिंयों का झुंड अपने काम में लगा था।मेरे लिए बर्तन साफ करना प्राथमिकता थी लिहाजा ऐसे बर्तनों को नल के नीचे रखा और तेज धार से चींटियां तितर-बितर हो गईं। पानी की धार से बची कुछ चीटिंयां रेंगते हुए हाथ पर चढ़ गई, फूंक मार कर उन्हें अलग किया इस बीच और पढ़े