समाज है तो सद्भावना है, यह सोसायटी अर्थात सोशल कॉन्ट्रैक्ट नहीं है..

  
Last Updated:  August 11, 2025 " 12:10 am"

मालवा प्रांत के विभिन्न जिलों से आए समाज प्रमुखों को संबोधित करते हुए बोले संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत।

इंदौर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन राव भागवत ने रविवार को स्थानीय ब्रिलियंट कन्वेशन सेन्टर में मालवा प्रांत के प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर के समाज प्रमुखों की सद्भाव बैठक को सम्बोधित किया। इस कार्यक्रम में मालवा प्रांत के 111 समाजों के 284 समाज प्रमुख उपस्थित रहें।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्जवलन एवं भारत माता पूजन के साथ हुआ। बाद में चयनित समाज प्रमुखों ने अपने समाज द्वारा किए जा रहे जनकल्याण एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी।

संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने उपस्थित समाज प्रमुखों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज है, तो सद्‌‌भावना है। समाज यानी सद्‌भावना, यह अपनेपन का रिश्ता है। यह सोसायटी अर्थात सोशल कान्ट्रेक्ट नहीं है। समाज में व्यक्ति और परिवार दोनों की सत्ता होती है। समाज का एक सामान्य उद्‌देश्य धर्मयुक्त जीवन होता है।

उपभोग़वादी विचार, परिवार व्यवस्था को खत्म कर रहा है।

संघ प्रमुख ने कहा कि मनुष्य को शरीर और उपभोग की वस्तु मानने वाले उपभोग वादी विचार ने पूरे यूरोप को ध्वस्त किया। यही विचार अब भारत की परिवार व्यवस्था को ध्वस्त करने का प्रयास कर रहा है। इसने संस्थाओं को अपने नियन्त्रण में लेकर समाज को तोड़ने के लिए विश्व के 50-60 घरानों से गठजोड़ कर लिया है। इनका उद्देश्य भारत के बाजार पर कब्जा करना है। इंग्लैण्ड में 2021 में आयोजित डिस्मेंटलींग हिन्दुत्व “सेमिनार ” के पीछे यही विचार था।

हर हिन्दू का सुख दुःख हमारा है।

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत मे धर्म और राष्ट्र एक ही बात है। इसके लिये किया जाने वाला हर कार्य, ईश्वरीय कार्य है। स्वामी दयानन्द सरस्वती, स्वामी विवेकान्द आदि महापुरुषों ने जात-पात से ऊपर उठकर समाज में राष्ट्र भाव जागृत करने का कार्य किया। समाज व परिवार के लिए मातृ शक्ति का चिन्तन पुरुषों से अधिक व्यापक होता है। उन्होंने समाज प्रमुखों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर सभी जाति-बिरादरी के साथ बैठकर अपनी बिरादरी के उत्थान के लिए चिन्तन करें। कमजोर समाज को उपर उठाने में मिलकर प्रयास करें। सब समाज मिल कर राष्ट्र व हिंदू समाज के प्रश्नों का समाधान करें। हम हिंदू हैं, हर हिंदू का सुख-दु:ख हमारा सुख-दु:ख है।

कार्यक्रम का संचालन जसविंदर सिंह ठकराल ने किया। अतिथि परिचय दिनेश गुप्‍ता ने दिया। आभार राधेश्याम पाटीदार ने माना।

इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. भागवत ने द्वारा विभिन्न जिलों से आए समाज प्रमुखों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। बैठक में आगामी नवंबर माह में खण्ड (तहसील) स्तर पर सद्भाव बैठकों के आयोजन की योजना भी बनाई गई।

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