आत्मनिर्भर भारत में विश्वविद्यालयों की भूमिका हो सुनिश्चित- एबीवीपी

  
Last Updated:  February 3, 2021 " 10:33 pm"

इंदौर : एबीवीपी के हाल ही में सम्पन्न हुए 53 वे प्रांतीय अधिवेशन में नए पदाधिकारियों के निर्वाचन के साथ तीन प्रस्ताव भी पारित किए गए।

समय की मांग के अनुरूप हो शिक्षा नीति।

अधिवेशन में पहला प्रस्ताव ‘शैक्षणिक परिदृश्य’ पर केंद्रित रहा। इसके तहत भारतीय विचारों पर केंद्रित और समय की मांग के अनुरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने पर खुशी जताते हुए उसपर शीघ्र अमल की मांग की गई। प्रस्ताव में एससी- एसटी व पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी करने, रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति करने, विवि में लागू आईयूएमएस प्रणाली पर रोक लगाने और सभी के लिए शिक्षा सुलभ कराने की मांग की गई।

हुक्का बार व पब पर लगे पाबंदी।

प्रांतीय अधिवेशन में “प्रदेश में वर्तमान परिदृश्य” पर केंद्रित दूसरे प्रस्ताव में प्रदेश में किसान सम्मान निधि में 4 हजार रुपए अतिरिक्त जोड़ने और धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2020 लागू करने का स्वागत किया गया। प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कानून बनाने और हुक्का बार व पब पर रोक लगाने की मांग की गई।

आत्मनिर्भर मप्र बनाने में विवि की भूमिका सुनिश्चित हो।

एबीवीपी के प्रांतीय अधिवेशन में पारित तीसरे प्रस्ताव ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत आत्मनिर्भर मप्र बनाने के लिए विश्वविद्यालयों की भूमिका तय करने पर जोर दिया गया। विवि में इनोवेशन सेल का गठन कर लघु और सूक्ष्म उद्यमों को पाठ्यक्रमों में सम्मिलित करने की मांग भी सरकार से की गई, जिससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया जा सके।
एबीवीपी के मालवा प्रान्त के नवनिर्वाचित मंत्री घनश्याम सिंह चौहान ने बताया कि ये प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजे जा रहे हैं, ताकि उन पर विचार कर सरकार उचित निर्णय ले सकें।

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