जीवन में प्राप्त धन व यश की सार्थकता समाज को लौटाने में है : स्वामी अवधेशानंद जी

  
Last Updated:  February 11, 2024 " 12:52 am"

सालासर धाम में इंदौर के बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन द्वारा 40 करोड़ की लागत से निर्मित चमेलीदेवी अग्रवाल मांगलिक भवन का लोकार्पण।

इंदौर : जीवन में प्राप्त उपलब्धियां, धन और यश तब तक निरर्थक हैं जब तक समाज को वापस लौटाने की जिम्मेदारी का निर्वहन न किया जाए।आमजन की सुविधा और सेवा के विचार से निर्मित यह भवन विनोद अग्रवाल की इसी विचारधारा को दर्शाता है। अपने जीवन के 60 वर्षों में उन्होंने कर्म क्षेत्र के साथ ही धर्म, सेवा और सदाचार के क्षेत्र में भी निरंतर कर्मठता दिखाई है जिसका सुफल उनके द्वारा निर्मित विभिन्न जनसेवा निर्माणों व अभियानों में झलकता है।

यह प्रेरक विचार आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के हैं जो उन्होंने शनिवार को सालासर बालाजी धाम पर इंदौर के बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन द्वारा 40 करोड़ की लागत से निर्मित चमेली देवी अग्रवाल मांगलिक भवन का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर
विनोद नीना अग्रवाल, उनके अग्रज पुरुषोत्तम अग्रवाल एवं अनुज संजय अग्रवाल सहित अनेक परिजन, उद्योगपति, समाजसेवी और स्नेहीजन भी उपस्थित थे। स्वामी अवधेशानंद जी ने इस परिसर में विनोद अग्रवाल के माता-पिता की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। कार्यक्रम में बालाजी सेवार्थ के प्रमुख विनोद अग्रवाल एवं उनकी धर्म पत्नी श्रीमती नीना अग्रवाल के जन्मोत्सव के उपलक्ष में दो दिवसीय भजन गंगा, गौ सेवा की श्रृंखला में गौशाला में छप्पन भोग, खाटू श्याम नृत्य नाटिका सहित अनेक आयोजन किए गए। सालासर बालाजी धाम के प्रतिष्ठित पुजारी एवं आचार्य तथा इंदौर एवं मालवांचल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए संत विद्वान भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उद्घाटन के तुरंत बाद इस मांगलिक भवन को जिला जींद स्थित सालासर धर्मार्थ ट्रस्ट को सौंप दिया गया।

एक सामान्य साधन संपन्न परिवार अपने बच्चों का विवाह लक्ज़री सुविधाओं के साथ पूर्ण कर सके, आज के दौर में यह एक बड़ी चुनौती होती है। एक सर्वसुविधायुक्त और किफायती मांगलिक भवन के साथ बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन इस चुनौती को दूर करता है।
इस शानदार और भव्य मांगलिक भवन ने आमजन को 5 सितारा सुविधाओं के साथ किफायती बजट में मांगलिक आयोजन करने का अवसर तो प्रदान किया ही है, इससे धार्मिक व आध्यात्मिक टूरिज़्म, डेस्टिनेशन वेडिंग और स्थानीय रोजगार जैसे आयामों को भी और मजबूती मिलेगी।

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