स्वर प्रवाह की पहली सुरमयी पेशकश से नए साल का अभिषेक
इंदौर : कोरोना काल ने लोगों को लंबे समय तक चारदीवारी में कैद रहने पर मजबूर कर दिया था। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लोग जैसे भूल ही गए थे कि कला और संस्कृति भी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसके बिना जिंदगी रंगहीन सी हो जाती है। खैर, वक्त बीतने के साथ कोरोना का खतरा कम होने लगा तो अब गीत- संगीत और अन्य सामाजिक गतिविधियों के आयोजन भी गाइडलाइन का पालन करते हुए होने लगे हैं।इसी कड़ी और पढ़े










