शरीफों के खेल पर नियमों की बदमाशी ने लगाया दाग
{चंद्रशेखर शर्मा}क्या कमाल फाइनल रहा ये ! कहें तो इस पर हजार तरह के तब्सिरे मुमकिन हैं और नामुमकिन है कि कोई एक भी मुकम्मल निकले। सो बढ़िया ये है कि उन पूरे एक सौ दो ओवरों पर कोई रोशनी ही न डाली जाए और बेहतर होगा कि सब अपने-अपने सर्चलाइट के रोशन आनन्द से उसे निहारें, मजा लें। कैलिडोस्कोप का हिंदी तर्जुमा होता है बहुबिम्बदर्शी ! इसलिए कि उसमें बेशुमार बिम्ब होते हैं, दिखते हैं। बेशक उन सबकी अपनी और पढ़े











