श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर सरकार ने राज्य में गैरकानूनी ढंग से दिखाए जा रहे 34 टीवी चैनलों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इनमें पाकिस्तान और सउदी अरब के चैनल भी शामिल हैं। महबूबा सरकार ने सभी डिप्टी कमिश्नर्स को इन चैनलों के खिलाफ एक्शन लेने को कहा है। सरकार का कहना है कि इन चैनलों के जरिये राज्य में हिंसा भड़काई जा सकती है जिससे कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा हो सकती है। उधर, कश्मीर से सीरिया और इराक के बीच की जा रही इंटरनेट चैटिंग भी सिक्युरिटी एजेंसियों के रडार पर है। बता दें कि ISIS कश्मीर में अपना बेस बनाने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि कश्मीर में फेसबुक, ट्विटर समेत 22 सोशल मीडिया साइट्स पर पहले से बैन है।
केंद्र सरकार के इंस्ट्रक्शन पर उठाया कदम…
– न्यूज एजेंसी के मुताबिक महबूबा सरकार ने यह कदम केंद्र सरकार के उस इंस्ट्रक्शन के बाद उठाया है जिसमें कहा गया था कि राज्य में ब्रॉडकॉस्ट हो रहे अनऑथोराइज्ड पाकिस्तानी और सउदी अरब के चैनलों पर रोक लगाने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए।
– होम डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी आरके गोयल की तरफ से शनिवार को सभी डिप्टी मजिस्ट्रेट (डिप्टी कमिश्नर) को ऑर्डर जारी किया गया। इसके मुताबिक यह पाया गया है कि घाटी के केबल ऑपरेटर्स भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग से इजाजत लिए बगैर कुछ टीवी चैनलों को दिखा रहे थे। यह भी पता चला है कि ये चैनल लोगों को हिंसा के लिए भी उकसा रहे थे। इजाजत के बिना किसी भी टीवी चैनल को ब्रॉडकॉस्ट करना केबल टीवी नेटवर्क्स रेगुलेशंस के रूल्स का वॉयलेशन है।
जाकिर नाइक का चैनल भी बंद
– जिन चैनलों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है, उनमें इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक का पीस टीवी का उर्दू और इंग्लिश चैनल भी शामिल है। नाइक पर भड़काऊ भाषण देने और यूथ को बरगलाने के आरोप हैं। इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है।
– अन्य चैनलों में एआरवाई क्यूटीवी, मदनी चैनल, नूर टीवी, हदी टीवी, पैगाम, हिदायत, सउदी अल-सुन्नाह अल नबावियाह, सउदी-अल-कुरान अल-करीम, सहर, कर्बला टीवी, मैसेज टीवी, हम टीवी आदि शामिल हैं।
22 सोशल मीडिया साइट्स पर पहले से बैन
– महबूबा सरकार खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर 26 अप्रैल से ही राज्य में फेसबुक, ट्विटर समेत 22 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगा चुकी है। इनमें वॉट्सएप, वी चैट, स्काइप, वाइबर, स्नैपचैट, यू-ट्यूब भी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि पाकिस्तान इन सोशल साइट्स का इस्तेमाल घाटी में हिंसा फैलाने के लिए कर रहा था।
कश्मीर को बेस बनाने की फिराक में है ISIS
– सिक्युरिटी एजेंसियों का मानना है कि आईएसआईएस कश्मीर को अपना बेस बनाने की फिराक में है। पिछले 6 महीनों में सीरिया और इराक में बैठे उसके हैंडलर्स ने कश्मीर के कई लड़कों से इंटरनेट चैटिंग के जरिये कॉन्टैक्ट किया था।
– पिछले महीने पुलवामा में हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकी की कब्र पर हथियार लिए 2 नकाबपोश दिखाई दिए थे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से तालिबान और आईएसआईएस के फरमान फॉलो करने और पाकिस्तान का सपोर्ट नहीं करने को कहा था।









