अपने चार दशक के अनुभव, किस्से और घटनाक्रमों को इस पुस्तक में किया है संकलित।
इंदौर (राजेंद्र कोपरगांवकर): कीर्ति राणा इंदौर के पत्रकारिता जगत का वो नाम है, जिन्होंने अपना अलग मुकाम बनाया है। बड़े – बड़े अखबार समूहों में काम कर चुके कीर्ति राणा किसी बैनर के मोहताज नहीं रहे। खबरों को अलग अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है। वे चाहें किसी अखबार में समूह संपादक रहे हों या संपादक, मैदानी पत्रकारिता से उन्होंने कभी मुंह नहीं मोड़ा। यही कारण है कि पत्रकारिता में चार दशक गुजारने के बाद भी उनमें खबरों को लेकर किसी नौजवान पत्रकार सा जोश और जुनून नजर आता है। पत्रकारिता के इस लंबे सफर में ऐसे कई किस्से, घटनाक्रम, अनुभवों के वे साक्षी बनें जिन्हें उन्होंने अपनी कलम के जरिए कागज पर उतारा। उनकी कलमगिरि के ऐसे कई किस्सों को संकलित कर यशराज मार्कट्रेड इंडिया ने पुस्तक का प्रकाशन किया है।
शुक्रवार को जाल सभागृह में आयोजित समारोह में कीर्ति राणा की इसी पुस्तक ‘किस्से कलमगिरी के’ का लोकार्पण किया गया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जीवन प्रबंधन गुरु विजय शंकर मेहता, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी और माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि, भोपाल के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी कार्यक्रम में अतिथि के बतौर मौजूद रहे। अध्यक्षता राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन ने की।
पुस्तक के औपचारिक लोकार्पण के बाद उपस्थित प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए जीवन प्रबंधन गुरु विजय शंकर मेहता ने कहा कि कीर्ति राणा और उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक एकसाथ पत्रकारिता की है। कीर्ति राणा की यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित होगी क्योंकि उन्होंने अपनी बात को बेबाकी के कहा है। मेहता ने कहा कि वर्तमान दौर में जब पत्रकारिता कठिन दौर से गुजर रही है, वहां सत्य को तलाशना बड़ा मुश्किल है। ऐसे में कीर्ति राणा की यह पुस्तक सत्य को सामने लाने का काम करती है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कीर्ति भाई परिश्रम के पर्याय हैं। वे मेरे मार्गदर्शक रहे हैं। उनकी सीख मेरे लिए संजीवनी का काम कर रही है।
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिन्दुस्तानी ने कहा कि कीर्ति भाई मैदानी संपादक हैं। वे पत्रकारिता के आइएएस हैं। वे खुलकर अपनी बात कहते हैं और किसी को बख्शते भी नहीं हैं। वर्षों पहले उन्होंने इंदौर के जिला जेल में फांसी की लाइव रिपोर्टिंग की थी, वो आज भी याद की जाती है।
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि, भोपाल के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि कीर्ति भाई की चार दशक की पत्रकारिता में करीब तीन दशक तक मैने और उन्होंने साथ में रिपोर्टिंग की। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। कीर्ति भाई हर बात को गंभीरता से सुनते हैं फिर उसपर कलम चलाते हैं। कीर्ति भाई जैसे पत्रकार बिरले ही हैं जो विकट परिस्थितियों में भी अपना पत्रकारिता धर्म नहीं छोड़ते।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन ने अपने संबोधन में कीर्ति राणा को बधाई देते हुए कहा कि वे एक ऐसे पत्रकार हैं, जिन्होंने हमेशा दूसरों के हक के लिए कलम चलाई। कीर्ति भाई हैं तो वामन रूप लेकिन उनकी लेखनी ने उनके व्यक्तित्व को विराट बना दिया। वे इंदौर के लालबहादुर शास्त्री हैं। श्री सत्तन ने अखबारी दुनिया के संघर्ष और पत्रकारों की पीड़ा को अभिव्यक्त करती एक कविता भी सुनाई।
पुस्तक ‘ किस्से कलमगिरी के’, के रचयिता कीर्ति राणा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह किताब उनके अनुभवों का दस्तावेज है, जिससे युवा पत्रकार बहुत कुछ सीख सकते हैं। इस पुस्तक से यह भी समझा जा सकता है कि पत्रकारिता में कितना बदलाव आ गया है। पुराने दौर में आज की तरह संसाधन और सुविधाएं नहीं थी। स्पॉट रिपोर्टिंग बेहद चुनौतीपूर्ण हुआ करती थी। उसी ने मुझे पहचान दिलाई। समाज में उन्हें जो सम्मान मिला वह मैदानी पत्रकारिता की ही देन है। परिवार के सहयोग और समर्पण से ही वे इस पुस्तक को लिख और प्रकाशित करवा सकें।
इनका किया गया सम्मान :-
कार्यक्रम में पत्रकारिता में दीर्घ सेवा के लिए वरिष्ठ पत्रकार उमेश रेखे, पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर भोपाल, डॉ. विवेक चौरसिया उज्जैन और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरएस माखीजा को अतिथियों के हाथों अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण मीना राणा शाह ने दिया। संचालन सांस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी, उपाध्यक्ष दीपक कर्दम, कोषाध्यक्ष संजय त्रिपाठी, स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, कोषाध्यक्ष सोनाली यादव, मांगीलाल चौहान, कमलेश्वर सिंह, राजकुमार गुप्ता, प्रदीप मिश्रा, शैलेश पाठक, शिवाजी मोहिते, रामेश्वर गुप्ता, सीबी सिंह, संतोष सिंह गौतम, समर सिंह पंवार, निखिल दवे, धरा पाण्डेय, डॉ. आरपी बिरथरे, कौशल बंसल, नीलेश नीमा, सुनील जोशी, यशभूषण जैन, विपुल पटेल और बंसी लालवानी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार साथी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।









