खेड़ापति श्रीराम – हनुमान मंदिर की बेशकीमती जमीन से अतिक्रमण हटाकर लिया कब्जा

  
Last Updated:  July 29, 2025 " 06:30 pm"

कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई।

नामांतरण, बटांकन किए निरस्त।

इंदौर : कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देशन में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए जिला प्रशासन के अमले ने 150 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बेशकीमती शासकीय मंदिर की जमीन से अतिक्रमण हटाकर उक्त जमीन का कब्जा प्राप्त किया। उक्त भूमि पर कब्जा कर बनाये गए अवैध निर्माण भी ध्वस्त किये गए और अवैध रूप से बोई गई फसल को भी हटाया गया।

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्री आशीष सिंह द्वारा खेड़ापति हनुमान मंदिर की पिपल्याकुमार स्थित खसरा क्रमांक-206 की जमीन के संबंध में सभी बटांकन के नामांतरण आदेश को निरस्त किया गया है। उक्त जमीन खेडापति मंदिर एवं श्रीराम मं‍दिर व्यवस्थापक कलेक्टर के नाम से शासकीय अभिलेखों में दर्ज की गई।
एसडीएम श्री प्रदीप सोनी ने बताया कि उक्त आदेश के परिपालन में आज जिला प्रशासन के अमले द्वारा नगर निगम के सहयोग से ग्राम पिपलियाकुमार स्थित भूमि खसरा क्रमांक-206 के समस्त बटांकन का कुल रकबा 1.1890 हेक्टेयर से अतिक्रमण हटाकर भूमि का कब्जा लिया गया। मौके पर उक्त भूमि शासकीय मंदिर के स्वामित्व होने संबंधी सूचना पटल भी लगाया गया है। इस सूचना पटल के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि उक्त भूमि ग्राम पिपलियाकुमार खसरा क्रमांक-206 शासकीय भूमि श्री राम एवं खेडापति मंदिर की है। इस भूमि पर किसी भी प्रकार का अनाधिकृत प्रवेश, कब्जा,निर्माण अथवा किसी भी तरह का उपयोग अवैधानिक है। किसी भी प्रकार की अवैधानिक गतिविधि पाये जाने पर दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी।
बताया गया कि मंदिर की ज़मीन बेचने का अधिकार पुजारी को कभी भी नहीं था । फिर भी उक्त जमीन को बेच दिया गया । क़ानून में मदिर को नाबालिग माना है , जिसकी संपत्ति के अभिरक्षा करने का दायित्व संबंधित जिला कलेक्टर को है , मंदिर की भूमि से होने वाली आय भी मंदिर के खाते में जाना चाहिए । परंतु कुछ भू माफियाओं ने कूट रचित और अवैधानिक विक्रय पत्र से नामांतरण करवा लिए ।
कलेक्टर आशीष सिंह ने इसे गंभीरता से लिया और राजस्व बोर्ड के आदेश के अनुक्रम में सारे नामांतरण निरस्त कर दिये। यह बात भी उल्लेखनीय है कि भूमि स्वामित्व सिर्फ राजस्व रिकॉर्ड में ही बदले , पर सरकार ने कभी भी कब्जा नहीं छोड़ा। आज जिला प्रशासन ने अपना कब्जा पुनर्स्थापित किया और यह सिद्ध किया की मंदिर की संपत्ति पर किसी भी प्रकार की अवैधानिक कब्जे को तत्काल बेदखल किया जाएगा। पूरे जिले में अब सभी शासकीय मंदिर की भूमियों पर शासन अपना कब्जा पुनर्स्थापित करेगा।

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