कैंसर व अन्य बीमारियों इलाज में कारगर महंगी दवाइयों के रखरखाव में बरती जा रही गंभीर लापरवाही।
एक्सपायरी दवाइयों का मिला बड़ा जखीरा।
डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के औचक निरीक्षण में उजागर हुई ये कमी – खामियां।
इंदौर : गंभीर बीमारियों से ग्रसित गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों के मरीजों के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इंदौर का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बदइंतजामी का शिकार होता जा रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध इस हॉस्पिटल का कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने वरिष्ठ डॉक्टरों के दल के साथ औचक निरीक्षण किया तो कई कमी – खामियों के साथ लापरवाही और बदइंतजामी का खुलासा हुआ। स्पष्ट था कि जिनके कंधों पर अस्पताल को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी है, वे उसे ठीक ढंग से नहीं निभा पा रहे हैं।
हॉस्पिटल के ड्रग स्टोर के निरीक्षण के दौरान डीन डॉ. घनघोरिया को भारी लापरवाही देखने को मिली। महंगी वैक्सीन और कैंसर की बायोलॉजिकल ड्रग्स कोल्ड चेन की बजाय कमरे में रखी मिली। कैंसर के उपचार में काम आनेवाले 500 से अधिक इंजेक्शन खराब फ्रीज़र में रखे पाए गए। आइवी फ्ल्यूड की बोतलें जमीन पर पड़ी हुई थीं। बड़ी मात्रा में दवाइयां, इंजेक्शन और सर्जिकल डिस्पोजेबल्स एक्सपायरी डेट के पाए गए। यही नहीं स्टॉक रजिस्टर और स्टोर में रखी दवाइयों की मात्रा में भी अंतर पाया गया।
गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज में उपयोग की जाने वाली लाखों रूपए कीमत की दवाइयों की इस तरह बर्बादी देख कर डीन डॉ. घनघोरिया भड़क गए। उन्होंने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक और अन्य जिम्मेदारों पर नाराजगी जताते हुए फटकार भी लगाई। एक्सपायरी डेट की सभी दवाइयां पंचनामा बनाकर जब्त की गई और उन्हें डीन कार्यालय में रखवाया गया, ताकि उन्हें डिस्पोज ऑफ करवाया जा सके।
औचक निरीक्षण के दौरान डीन डॉ. घनघोरिया के साथ डॉ. डीके शर्मा, डॉ. सुनील आर्य, डॉ. पंकज पाराशर, फार्मासिस्ट राकेश गोखले और रंजीत सिलावट मौजूद रहे।
डीन के दौरे में पाई गई गभीर खामियों के चलते ये माना जा रहा है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के प्रबंधन में खासा बदलाव हो सकता है। यहां तक कि अधीक्षक को भी बदला जा सकता है।








