रिश्तों की जटिलताओं में उलझे रहस्य व रोमांच से भरपूर नाटक ‘खेळ’ का दमदार मंचन

  
Last Updated:  August 16, 2026 " 04:51 pm"

नाट्य भारती की प्रभावी प्रस्तुति के साथ 21वीं सानंद नाट्य स्पर्धा का समापन

इंदौर : संस्था नाट्य भारती की जोरदार प्रस्तुति के साथ ही 21 वीं सानंद मराठी नाट्य स्पर्धा का समापन हो गया।

नाट्य भारती ने अनिल दांडेकर लिखित और अनिरुद्ध किरकिरे निर्देशित नाटक खेळ का प्रभावी मंजन किया। मुंबई की चकाचौंध से दूर एक शांत गांव में बसने वाले चिंतामणि और कावेरी के बाहर से सामान्य दिखने वाले जीवन में मची मानसिक उथल-पुथल को रहस्य और रोमांच के कलेवर के साथ इस नाटक में पेश किया गया। नाटक दर्शकों पर आरंभ से अंत तक अपनी पकड़ बनाए रखता है।

कावेरी कभी फिल्म जगत की चर्चित अभिनेत्री रही है, लेकिन अब उसने उस दुनिया से नाता तोड़ लिया है। इसके बावजूद उसका अतीत उसके वर्तमान का पीछा नहीं छोड़ता। पति चिंतामणि का शंकालु स्वभाव इस रिश्ते को और अधिक जटिल बना देता है। उसे आशंका है कि कावेरी का पुराना प्रेमी उससे मिलने वाला है। पत्नी के प्रति उसका मानसिक उत्पीड़न और असामान्य व्यवहार कहानी को लगातार तनावपूर्ण बनाता है। स्थितियां तब रहस्यमय हो जाती हैं, जब चिंतामणि स्वयं पुलिस में कावेरी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराता है।
इसके बाद घर में दाखिल होने वाला सब-इंस्पेक्टर केवल एक गुमशुदगी की जांच नहीं करता, बल्कि दर्शकों के सामने रिश्तों, स्मृतियों और मनोवृत्तियों की परतें खोलता जाता है। पूछताछ के दौरान सामने आने वाले अप्रत्याशित तथ्य कहानी को बार-बार नई दिशा देते हैं। कौन सच बोल रहा है और कौन कहानी गढ़ रहा है, यह सवाल दर्शकों के मन में लगातार बना रहता है।
अनिल दांडेकर की कसावट भरी पटकथा और धारदार संवाद नाटक के तनाव को कहीं ढीला नहीं पड़ने देते। अनिरुद्ध किरकिरे का निर्देशन रहस्य को बनाए रखते हुए दृश्यों की गति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है। नेपथ्य, प्रकाश योजना और पार्श्व संगीत मिलकर शांत वातावरण में छिपी बेचैनी को गहरा करते हैं।

चिंतामणि की मानसिक व्याकुलता, कावेरी के अतीत का दर्द और पुलिस अधिकारी की संयमित पड़ताल,तीनों प्रमुख भूमिकाओं में कलाकारों का प्रभावी अभिनय नाटक को विश्वसनीयता देता है। अंत में रहस्य की अंतिम परत खुलती है तो दर्शकों को अप्रत्याशित झटका मिलता है। ‘खेल’ केवल सस्पेंस का नाटक नहीं, बल्कि संदेह किस तरह रिश्तों और मनुष्य की मानसिक दुनिया को भीतर से खोखला कर सकता है, इसकी भी प्रभावशाली पड़ताल है।

ये हँ नाटक के कलाकार :-

विकास डिंडोरकर, सौजन्य लघाटे, समृद्धि बेलसरे और आर्यन गर्गे।

ध्वनि संकलन : शशिकांत किरकिरे, रंगभूषा योजना : अंकुर लोकरे, वेषभूषा योजना : श्रुतिका जोग-कळमकर,नेपथ्य योजना अनिरूद्ध किरकिरे, प्रकाश योजना अभिजीत कळमकर।

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