ध्यान में मग्न होकर एकाग्र होने की प्रेरणा देते हैं देवाधिदेव महादेव
शिव ईश्वर का सत्यम-शिवम-सुंदरम रूप है। शिव वो है जो सहजता एवं सरलता से सुशोभित होते है। वे ऐसे ध्यानमग्न योगीश्वर है जो नीलकंठ बनकर अपने भीतर विष को ग्रहण किए हुए है और भुजंगधारी बनकर विष को बाहर सजाए हुए हैं। इसके बावजूद उमापति की एकाग्रता, शांतचित्त रूप और ध्यान में कहीं भी न्यूनता परिलक्षित नहीं होती। वैभव देने वाले भोलेनाथ स्वयं वैरागी रूप में विराजते हैं। सृष्टि के कल्याण के लिए शांत भाव और सहजता से विषपान को और पढ़े











