कृष्णलीला में निहित जीवन दर्शन
देवकीनंदन, यशोदानन्दन, द्वारिकाधीश, आनन्दसागर, दयानिधि कृष्ण के स्वरुप का वर्णन एवं गुणगान असंभव है। कृष्ण तो वो विलक्षण व्यक्तित्व है जिसकी कल्पना स्वप्न से भी परे है।पुरषोत्तम, मुरली मनोहर, श्याम सुन्दर के किस रूप का वंदन करें, बाल्यरूप, सखारूप, प्रेमी स्वरुप,पुत्र रूप,ज्ञान के प्रवर्तक, प्रत्येक रूप एक अनोखी लीला है, जिसकी गूढ़ता समझ पाना तो प्राणिमात्र के लिए संभव ही नहीं है।हम लोग सदैव जीवन में विषमताओं से घबराते है, पर मधुसूदन का जीवन तो विषमताओं के कालचक्र से ही और पढ़े











