इंदौर : इंदौर – मनमाड रेल परियोजना के मामले में घूम फिरकर बात फिर सर्वे पर पहुंच गई है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए महज दो करोड़ रूपए की राशि सेंट्रल रेलवे को आवंटित की है। इसे भी सांसद लालवानी अपनी उपलब्धि बता रहे हैं।
2017 में बनी थी डीपीआर।
मप्र और महाराष्ट्र के पिछड़े क्षेत्रों को जोड़ने और उनके विकास के लिहाज से अहम मानी जाने वाली इंदौर – मनमाड रेल परियोजना की मांग लंबे समय से की जा रही है। रेलवे की इस परियोजना में कभी रुचि नहीं रही।जनप्रतिनिधियों की मांग पर पहले इस परियोजना का खर्च मप्र और महाराष्ट्र सरकारों द्वारा मिलकर उठाने की बात कही गई थी पर मप्र सरकार के पीछे हटने से बात आगे नहीं बढ़ी। 2017 में सर्वे के बाद इसकी डीपीआर तैयार हुई। 2018 में तय हुआ कि मप्र व महाराष्ट्र सरकार और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट मिलकर इसे अंजाम देंगे। नेहरू पोर्ट ट्रस्ट ने 600 करोड़ रूपए इस परियोजना पर खर्च करने की हामी भी भरी थी लेकिन बाद में उसने भी अपने हाथ खींच लिए।इसके चलते इंदौर – मनमाड का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। अब जब रेलवे द्वारा इसपर काम करने की पहल की भी गई है तो मामला फिर शून्य से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि पुराने प्रोजेक्ट में धरातल पर कई बदलाव हो गए हैं, ऐसे में नए सिरे से सर्वे की जरूरत है।
सर्वे कब तक पूरा होगा स्पष्ट नहीं..?
इंदौर – मनमाड रेल लाइन के पुनः सर्वे का ऐलान तो कर दिया गया है पर उसके लिए भी आवंटित राशि बहुत कम है, ऐसे में सर्वे कैसे और कब तक पूरा होगा..? कहना मुश्किल है। सर्वे के बाद नए सिरे से डीपीआर भी तैयार होगी।
बहुउपयोगी है इंदौर – मनमाड रेल प्रोजेक्ट।
इंदौर – मनमाड रेल प्रोजेक्ट मप्र और महाराष्ट्र के पिछड़े क्षेत्रों के विकास को नए आयाम दे सकता है। करीब 348 किमी की यह रेल लाइन धामनोद, ठीकरी, जुलवानिया, सेंधवा, शिरपुर, धुले, मालेगांव जैसे क्षेत्रों को जोड़ेगी। इससे इंदौर – मुंबई के बीच की दूरी कम तो होगी ही, पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को भी इसका लाभ होगा।









