रील्स जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गई है..
स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम में बोले फिल्म लेखक व एडिटर सुनील सालगिया।
इंदौर : फिल्म एडिटर, निर्देशक एवं लेखक सुनील सालगिया का कहना है कि कंप्यूटर के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस सदी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है। एआई पर दुनिया भर की जानकारी मौजूद है लेकिन इसका उपयोग किस तरह किया जाना है यह महत्वपूर्ण है।
सुनील सालगिया स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के रूबरू कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में एआई कई मामलों में मददगार साबित हो रहा है। एआई के माध्यम से विजुअल, वीडियो, ऑडियो के बेहतर ऑप्शन मिल रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि एआई के माध्यम से वॉयस रिकार्डिंग आसान हो गई है। आर्टिस्ट के व्यस्त होने पर उसके वॉयस सैंपल से हूबहू रिकार्डिंग हो जाया करेगी।
सालगिया ने कहा कि नई-नई तकनीक के सहारे आज-कल झूठ भी परोसा जा रहा है। लोगों के पास सच पता करने का वक़्त नहीं है। सभी के जीवन में 30 सेकण्ड की रील ज्यादा अहम हो गई है।
सालगिया ने बताया कि दो वर्ष पूर्व उन्होंने लेखन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘वन अपॉन अ टाइम इन बॉलीवुड’ नॉवेल लिखा। इस नॉवेल में उनके थिएटर, फिल्म डायरेक्शन एवं एडिटिंग से जुड़े तमाम अनुभव शामिल हैं। अभी वे दो नॉवेल पर और काम कर रहे हैं।
सालगिया ने बताया कि फिल्म फोर्मेट पर बनी साढ़े तीन घंटे की ऐतिहासिक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म मुग़ल-ए-आज़म को कलर फिल्म में तब्दील करना उनके जीवन का अविस्मरणीय कार्य रहा। प्रसिद्ध निर्देशक के. आसिफ ने कई उतार-चढ़ाव के बाद चौदह वर्षों में यह फिल्म बनाई थी। उन्होंने एडिटर के रूप में दो वर्षों की अथक मेहनत के बाद इस फिल्म को डिजिटल कलराइजेशन के माध्यम से 2004 में रिलीज किया। रंगों को यथासंभव प्रमाणिक बनाने के लिए मुग़ल काल के चित्रों, कपड़ों और अन्य ऐतिहासिक सन्दर्भों का अध्यन किया गया। कलर के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया जिसमे प्रत्येक फ्रेम को अलग-अलग रंगों से पेंट किया गया। दर्शकों ने इस प्रयास को बहुत सराहा।
उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफोर्म, यूट्यूब, रेडियो एफएम आदि माध्यमों के प्रचलन की वजह से सभी के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। अस्सी के दशक की तुलना से आज बीस गुना काम बढ़ गया है। इन माध्यमों से कई प्रतिभाओं को अवसर और सम्मान दोनों मिल रहे हैं। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सुरीले गीत-संगीत की उम्मीद करना बेमानी है। आज-कल गीतों में हुकलाइन का ट्रेंड चल गया है जिसमे सिर्फ एक या दो वाक्य पर गीत हिट हो जाता है।
प्रारंभ में सुनील सालगिया का स्वागत प्रवीण खारीवाल, राजेश शिवणेकर, राकेश साहू, अजय भट्ट, कृष्णकांत रोकड़े एवं दीपक माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन सत्यजीत शिवणेकर ने किया।








