क्रांतिकारी मिसिर के जीवन पर लिखे गए भोजपुरी उपन्यास का विमोचन

  
Last Updated:  February 20, 2022 " 09:10 pm"

इन्दौर : छपरा के समीप के रहने वाले महेंद्र मिसिर एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जिनके बारे में बहुत कम लिखा गया। रामनाथ पाण्डेय के लिखे उपन्यास के माध्यम से क्रांतिकारी मिसिर को याद करने का मौका मिला है।
ये बात पुलिस आयुक्त, इंदौर हरिनारायण चारी मिश्र ने अपने उद्बोधन में कही। वे मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को इन्दौर प्रेस क्लब, मातृभाषा उन्नयन संस्थान व सारण भोजपुरिया समाज द्वारा आयोजित भोजपुरी उपन्यास ‘महेंद्र मिसिर’ के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। प्रेस क्लब के सभागार में सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने की। वरिष्ठ साहित्यकार हरेराम वाजपेयी व इन्दौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी रहे विशेष अतिथि के बतौर मौजूद रहे।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने अतिथियों का शब्द स्वागत किया तथा पुस्तक के लेखक रामनाथ पाण्डेय के व्यक्तित्व व कृतित्व का परिचय दिया।

विशेष अतिथि अरविन्द तिवारी ने अपनी बात रखते हुए महेंद्र मिसिर के किरदार से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि ‘इस समय ऐसे किरदारों से पूरे देश का परिचय होना चाहिए।’

इसके बाद आयुक्त इंदौर पुलिस हरिनारायणचारी मिश्र सहित सभी अतिथियों ने रामनाथ पांडेय लिखित उपन्यास ‘महेन्दर मिसिर’ का औपचारिक विमोचन किया।

सरल भोजपुरी भाषा में है उपन्यास।

आयोजन के विशिष्ट अतिथि हरेराम वाजपेयी ने इस मौके पर भोजपुरी भाषा के सौंदर्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘भोजपुरी से जुड़ाव मातृभाषा का कारक है, इस उपन्यास में सरल भोजपुरी में लेखन हुआ है।’

भोजपुरी समझना और जानना आसान।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदाप्रसाद उपाध्याय ने भोजपुरी और मालवा के संबंध दर्शाते हुए कहा कि ‘भोजपुर के निर्माण में मालवा के राजा भोज की भूमिका रही है। भोजपुरी समझना और जानना बहुत आसान है। इस उपन्यास को सभी को पढ़ना चाहिए ताकि भोजपुरी की सुंदरता से भी परिचय हो सके।’

अतिथियों को भेंट किया गया उपन्यास।

उपन्यास का लेखन स्व. रामनाथ पाण्डेय द्वारा किया गया था, जो भोजपुरी के पहले उपन्यास बिंदिया के लेखक रहे हैं। इन्दौर प्रेस क्लब, मातृभाषा उन्नयन संस्थान व सारण भोजपुरिया समाज द्वारा अतिथियों को स्मृति चिह्न के रूप में भोजपुरी का पहला उपन्यास ‘बिंदिया’ प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्वलन व सरस्वती पूजन किया। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी, इन्दौर प्रेस क्लब उपाध्यक्ष प्रदीप जोशी, सचिव संजय त्रिपाठी, मातृभाषा उन्नयन संस्थान के विघ्नेश दवे ने अतिथियों का स्वागत किया।संचालन मुकेश तिवारी ने किया। आभार विमलेंदु भूषण पांडेय ने माना।
कार्यक्रम में सुरेन्द्र जोशी, मोहित बिंदल, राहुल वाविकर, प्रदीप नवीन, प्रवीण बरनाले, अभय तिवारी, राजकुमार जैन सहित साहित्य व पत्रकार जगत के कई साथी मौजूद रहे।

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