दिलीप बिल्डकॉन के ठिकानों पर सीबीआई का छापा, 4 करोड़ हुए वसूल, कम्पनी के 4 बड़े अधिकारी गिरफ्तार

  
Last Updated:  January 1, 2022 " 08:52 pm"

भोपाल : केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अधिकारी को 20 लाख की रिश्वत दिए जाने के मामले में दिलीप बिल्डकॉन पर छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया है।
कम्पनी के देशभर में नई दिल्ली, बंगलौर, कोचीन, गुडगांव, भोपाल आदि स्थानों पर छापे मारे गए। एनएचएआई के अधिकारी सहित निजी कंपनी के जीएम, ईडी और चार अन्य लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें एक सीनियर आईपीएस अधिकारी के भाई भी शामिल हैं। सभी ठिकानों पर छापे में करीब चार करोड़ रुपए की वसूली हुई है।
बताया जाता है कि एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी बंगलौर को 20 लाख रुपए की रिश्वत दिए जाने के मामले में सीबीआई ने यह कार्रवाई की है।अबतक गिरफ्तार लोगों को अदालत में पेश कर कानुूनी कार्रवाई की जाएगी।

इनकी हुई गिरफ्तारी।

जानकारी के मुताबिक सीबीआई ने जिन छह लोगों की गिरफ्तारी की है, उनमेें एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अकील अहमद, कंपनी के महाप्रबंधक रत्नाकरण साजीलाल, कार्यकारी निदेशक देवेंद्र जैन, सुनील कुमार वर्मा सहित एक निजी व्यक्ति अनुज गुप्ता शामिल हैं। महाप्रबंधक साजीलाल, कार्यकारी निदेशक जैन व वर्मा दिलीप बिल्डकॉन के अधिकारी-कर्मचारी हैं। जैन एक आईपीएस अधिकारी के भाई हैं।

रिश्वत के लेनदेन पर थी नजर।

बताया जाता है कि निर्माण कार्यों से जुड़े मध्य प्रदेश के औद्योगिक घराने दिलीप बिल्डकॉन पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कार्रवाई की है। राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े एक अधिकारी से लेन-देन से जुड़ा था यह मामला, इसलिए सीबीआई ने योजनाबद्ध ढंग से कार्रवाई की। केंद्रीय जांच एजेंसी की कई दिनों से इस मामले पर नजर थी। बड़ी राशि का लेन-देन होने की वजह से जांच एजेंसी को इसमें काफी दिन लग गए। जब दिल्ली में इसे अंजाम दिया गया तो फिर जांच एजेंसी ने भोपाल में कंपनी के ठिकाने पर कार्रवाई की। इसमें संचालकों व अधिकारियों से भी पूछताछ की गई।

दिलीप बिल्डकॉन देश की बड़ी निर्माण कंपनी ।

गौरतलब है कि दिलीप बिल्डकॉन देश की बड़ी निर्माण कंपनी है। मध्य प्रदेश के अलावा इसके देशभर में कई राज्यों में सड़क और अन्य प्रोजेक्ट चल रहे हैं। मध्य प्रदेश में भोपाल का मेट्रो प्रोजेक्ट भी इस कंपनी के पास है। दिलीप बिल्डकॉन पर केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई की खबर को जांच एजेंसी ने काफी गुप्त रखा और करीब बारह घंटे बाद इसकी भनक लगी।

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