देश को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी नई शिक्षा नीति- आनंदी बेन

  
Last Updated:  February 19, 2021 " 06:14 pm"

इंदौर : देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा आयोजित वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नयी शिक्षा नीति की अहम भूमिका होगी। इसके माध्यम से युवाओं को समय और जरूरत के मान से रोजगारोन्मुखी शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति जीवन उपयोगी रहेगी।
समारोह में इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस.किरण कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति रेणु जैन भी उपस्थित थीं।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने उद्बोधन की शुरूआत में सीधी जिले में हुई बस दुर्घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि माँ अहिल्या बाई के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उनका पूरा जीवन प्रेम, सदभाव, मानवीयता, भक्ति, पशु प्रेम से ओत-प्रोत रहा है। श्रीमती पटेल ने कहा ‍कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। शिक्षा का विस्तार जितनी तेजी से होगा, आत्मनिर्भता भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगी। देश किस तरह आत्मनिर्भर बने इसके लिये शोध किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक शत-प्रतिशत बच्चों को प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा देने तथा 50 प्रतिशत युवाओं को उच्च शिक्षित बनाने के लक्ष्य की पूर्ति के लिये जमीनी स्तर पर कारगर प्रयास होना चाहिए। बालिकाओं की शिक्षा के साथ-साथ उनके पोषण स्तर में सुधार की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जाना चाहिए। बालिकाओं को शिक्षित करने और पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए नयी शिक्षा नीति में प्रावधान किए गए हैं। शिक्षा संस्थानों को कुपोषण में सुधार लाने के लिये आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति जीवन उपयोगी बनेगी। इस नीति में नवाचार होंगे। समय और जरूरत के मान से शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ्यक्रमों में 30 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय स्तर से जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे आचार-विचार भी होना चाहिए। युवाओं को बाल विवाह, दहेज आदि कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिये आगे आना चाहिए।
समारोह को संबोधित करते हुए इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस किरण कुमार ने कहा कि समय की जरूरत के हिसाब से विद्यार्थियों को तैयार करना होगा। उन्हें इस तरह शिक्षण-प्रशिक्षण देना होगा जिससे वे आने वाली समस्याओं का समाधान कर पाए। शिक्षा का क्षेत्र चुनौतीपूर्ण है। नयी सदी की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा दी जाना चाहिए। हमारे देश में शिक्षा की समृद्ध परम्परा रही है। ज्ञान-विज्ञान और तकनीकि की क्षेत्र में कई उपलब्धियां भारत ने प्राप्त कर विश्व में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। भारत पुन: विश्वगुरू बने इसके लिए सबको कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। युवाओं के पास जबरदस्त अवसर है कि वे अपने ज्ञान और कौशल को साबित करे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि माँ अहिल्या का जीवन हम सबके लिए आदर्श एवं प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह हर विद्यार्थी के लिये गौरवमयी और स्मरणीय क्षण होता है। उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने नई चुनौतियां हैं। शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। भारत में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। नई शिक्षा नीति शीघ्र लागू की जा रही है। यह शिक्षा नीति सरल, सर्वव्यापी तथा सर्वत्र होगी। नयी शिक्षा नीति से शिक्षा के उच्चतम मापदण्ड स्थापित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में प्रतिभावान विद्यार्थियों को स्वर्ण तथा रजत पदक, उपाधि, पीएचडी, डी लिट् आदि प्रदान किये गए। इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय पर प्रकाशित डाक टिकिट का विमोचन भी किया गया। प्रारंभ में कुलपति रेणु जैन ने स्वागत भाषण दिया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव अनिल शर्मा ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, प्रोफेसर, छात्र- छात्राएं और उनके अभिभावक मौजूद थे।

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