न्यायमित्र के बतौर महापौर ने ट्रैफिक से जुड़े मुद्दों पर रखी बात

  
Last Updated:  July 22, 2025 " 07:04 pm"

उच्च न्यायालय की डबल बेंच के समक्ष यातायात सुधारों के लिए दिए महत्वपूर्ण सुझाव।

इंदौर : मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ की डबल बेंच ने इंदौर शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़े मामलों में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है। महापौर ने मंगलवार को अधिवक्ता के रूप में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच के समक्ष पेश होकर पक्ष रखा।

पैरवी के दौरान इंदौर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर आशीष सिंह, पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और नगर निगम की ओर से आयुक्त शिवम वर्मा भी न्यायालय में उपस्थित रहे।

बतौर न्यायमित्र नियुक्त हुए महापौर भार्गव ने बताया कि उच्च न्यायालय ने उन्हें यातायात से जुड़े मुद्दों पर सहयोग हेतु न्याय मित्र के रूप में आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने अपने सुझाव और अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 35 लाख की जनसंख्या और लगभग समान संख्या में वाहनों वाले शहर में नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है।

न्यायमित्र के रूप में पैरवी करते हुए महापौर ने ई-रिक्शा के संचालन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप स्पष्ट नियम बनाए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने “ट्रैफिक मित्र” जैसे अभियानों को और तेज़ी से बढ़ाने की बात कही। टू-व्हीलर चालकों द्वारा नियम उल्लंघन पर जारी चालानों की वसूली के लिए उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि हर साल वाहन बीमा के समय बकाया चालान की राशि वसूली जाए।

बतौर न्यायमित्र महापौर भार्गव ने बताया कि उच्च न्यायालय ने सभी संबंधित विभागों—जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम—के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक स्थायी समिति गठित किए जाने का सुझाव दिया, जो नियमित बैठकों के माध्यम से यातायात संबंधी समस्याओं का समाधान करे।

महापौर ने उच्च न्यायालय को बताया कि शहर में नए ब्रिज, सड़कें और मेट्रो जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो रहा है, लेकिन ट्रैफिक इंजीनियरिंग के लिहाज से कॉलेज, कोचिंग और हॉस्टल क्षेत्रों की पार्किंग व्यवस्था, ऑन-स्ट्रीट और ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग जैसे मुद्दों पर नए नियम बनाना जरूरी है।

महापौर ने यह भी कहा कि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कुछ कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता है, जिन्हें सरकार और प्रशासन मिलकर जल्द लागू करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि ई-चालान और ट्रैफिक रेगुलेशन को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए जाएंगे।

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