विवादित ढांचा ढहने के बाद इंदौर में नहीं हुई थी हिंसा

  
Last Updated:  January 19, 2024 " 08:34 pm"

जिला व पुलिस प्रशासन ने 06 दिसंबर 1992 को अयोध्या की घटना होते ही लगा दिया था कर्फ्यू।

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौर में बेहद चुनौतीपूर्ण रही पत्रकारिता।

इंदौर प्रेस क्लब में वरिष्ठ पत्रकारों ने साझा किए उस दौर के संस्मरण और अनुभव।

इंदौर : सैकड़ों वर्षों के संघर्ष, हजारों लोगों के बलिदान और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का सपना साकार हो गया है। प्रभु श्रीराम आगामी 22 जनवरी को उसमें विधिवत विराजमान होने जा रहे हैं। प्रत्येक भारतीय के लिए यह गौरव और उल्लास का क्षण है। देखा जाए तो राम मंदिर आंदोलन के निर्णायक संघर्ष का दौर लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा से परवान चढ़ा, जिसकी परिणीति 1992 में विवादित ढांचा ढहाने के साथ हुई। उस दौर में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के साक्षी रहे वरिष्ठ पत्रकारों और छायाकारों ने अपने संस्मरण इंदौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘आंखन देखी-कानन सुनी’ कार्यक्रम में साझा किए।

सांस्कृतिक एकता की मिसाल है अयोध्या।

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि हम इतिहास को देखें तो धर्म के नाम पर बड़े-बड़े युद्ध हो रहे हैं, जिसमें हजारों नहीं लाखों लोग मारे जा रहे हैं। ऐसे में अयोध्या सांस्कृतिक एकता की अद्भुत मिसाल है, जहां जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले दोनों पक्षकार एक साथ अदालत जाते थे और एक – दूसरे के खिलाफ तर्क पेश करते थे।

06 दिसंबर को लाखों कारसेवक पहुंचे थे अयोध्या।

वरिष्ठ पत्रकार हेमन्त शर्मा जो 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में मौजूद थे, उन्होंने कहा कि तब मेरे जैसे युवा पत्रकार के लिए अयोध्या में लाखों कारसेवक और पुलिस के कड़े बंदोबस्त बीच रिपोर्टिंग करना रोमांचक अनुभव था। अयोध्या में हजारों कारसेवक मुट्ठी में सरयू नदी की रेत लेकर तमाम बाधाओं को पार करते हुए विवादित ढांचे को ढहा दिया। शाम होते-होते तो ढांचा की जगह समतल मैदान नजर आने लगा था। कई कारसेवक वहां लौटते हुए अपने साथ वहां की मिट्टी और ईंटे साथ लेकर गए थे। उस समय पूरे घटनाक्रम की रिपोर्टिंग करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि संसाधन नहीं थे। एसटीडी और फैक्स के जरिए ही खबरें भेजी जा सकती थीं।

पुलिस प्रशासन की सतर्कता और सूझबूझ से 06 दिसंबर 1992 को हिंसा से अछूता रहा इंदौर।

वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने कहा कि पुलिस प्रशासन की सतर्कता व सूझबूझ की वजह से इंदौर शहर में बाबरी ढांचा ध्वस्त होने के दिन 6 दिसंबर 1992 को हिंसा की आग में नहीं झुलसा। इसका श्रेय तत्कालीन जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को जाता है। उन्होंने घटना की गंभीरता को समझते हुए घटना के तत्काल बाद तमाम ऐहतियाती कदम उठाए और शहर में कर्फ्यू लगा दिया था।

महू में बिना ढील दिए आठ दिन तक लगा रहा कर्फ्यू।

वरिष्ठ पत्रकार और छायाकार दिनेश सोलंकी ने कहा कि महू में बाबरी विध्वंस के बाद किसी तरह की हिंसा नहीं हुई क्योंकि एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन ने कर्फ्यू का ऐलान कर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कर दिए थे। लगातार आठ दिन कर्फ्यू में ढील नहीं दिए जाने से लोगों के समक्ष भूखों मरने की स्थिति पैदा हो गई थी। बाद में पत्रकारों द्वारा सवाल उठाए जाने पर ही कर्फ्यू में ढील दी गई।

वरिष्ठ छायाकार दिलीप लोकरे ने कहा कि 80 और 90 का दशक बड़ा ही संवेदनशील रहा। ऐसे दौर में फोटोग्राफी करना बड़ा कठिन काम था। 6 दिसंबर के बाद जब इंदौर में एहतियात के तौर पर पुलिस प्रशासन ने कफ्र्यू लगा दिया गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान तनाव की स्थिति बनने पर कई बार फोटो खींचना जान को जोखिम में डालने जैसा होता था।

विषय का प्रवर्तन करते हुए इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने रामजन्म भूमि आंदोलन के उस दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में पत्रकारिता और फोटोग्राफी करना आसान नहीं था। आज जो अनुभव हमारे वरिष्ठ साझा कर रहे हैं, इससे पत्रकारिता की नई पीढ़ी को लाभ होगा।

सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कृष्णाकुमार अष्ठाना ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन की अगुवाई विहिप और बजरंग दल ने की थी। लोगों में कारसेवा के लिए इतना जुनून था की वे सैकड़ों किमी पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे थे। उस समय ‘सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे’ नारा बेहद प्रचलित था।उन्होंने कहा कि 1990 में अयोध्या पहुंचे लाखों कारसेवकों पर यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह गोलियां चलवा दी थी, जिसमें सैकड़ों कारसेवक शहीद हो गए थे। कहा जाता है की सरयू नदी कारसेवकों के खून से लाल हो गई थी।

‘अवध में आ गए रघुराई ‘ का लोकार्पण।

इस अवसर पर डॉ. अर्पण जैन अविचल द्वारा रचित गीत ‘अवध में आ गए रघुराई’ का लोकार्पण किया गया। गीत के गायक गायक रोहित रघुवंशी व रचयिता अर्पण जैन का अतिथियों द्वारा सम्मान भी किया गया।

अतिथियों का स्वागत प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी, उपाध्यक्ष प्रदीप जोशी, महासचिव हेमन्त शर्मा, कोषाध्यक्ष संजय त्रिपाठी व शैलेष पाठक ने किया। संचालन मुकेश तिवारी ने किया। आभार उपाध्यक्ष दीपक कर्दम ने माना।

इस मौके पर कार्यकारिणी सदस्य राहुल वावीकर, वरिष्ठ पत्रकार संजय जोशी, सुनील जोशी, रवीन्द्र व्यास, के.पी.एस. जादौन, डॉ. कमल हेतावल, राजीव उपाध्याय, राजेंद्र कोपरगांवकर, मांगीलाल चौहान, कैलाश मित्तल, लक्ष्मीकांत पंडित, बी.के. उपाध्याय, विद्युत प्रकाश पाठक, कमलेश सेन, महेश मिश्रा, विनोद शर्मा, प्रवीण जोशी, मार्टिन पिटों, लोकेंद्र थनवार, धमेन्द्र शुक्ला, खन्नू विश्वकर्मा, सोनू मसीह, हर्ष जैन, चेतन मोहनवानी सहित बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद थे। वहीं, अभ्यास मंडल के शिवाजी मोहिते, इंदौर लेखिका संघ की अध्यक्ष विनीता तिवारी, सचिव मणिमाला शर्मा, मराठी साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक अश्विन खरे, विचार प्रवाह साहित्य मंच की प्रचार प्रमुख राधिका मंडलोई, पंच कन्या संस्था की डॉ. समीक्षा नायक, प्रो. अखिलेश राव, दामोदर विरमाल, किशोर कोडवानी, सुभाष सिंघई, दीपक शिरालकर, डॉ. अजय जैन, बसंत सोनी, प्रांजल शुक्ल, पवन तिवारी, चेतन जोशी, रोहित रघुवंशी सहित अनेक प्रबुद्धजन भी मौजूद रहे।

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