तीन सौ करोड़ रुपए की लागत से लोक परिवहन के लिए बनाया गया था साढ़े 11 किमी लंबा यह कॉरिडोर।
इंदौर : अबाधित लोक परिवहन के लिए करीब तीन सौ करोड़ रुपए की लागत से 12 वर्ष पूर्व बनाया गया इंदौर का बीआरटीएस कॉरिडोर जल्द ही हटा दिया जाएगा। जबलपुर हाई कोर्ट ने इसे हटाने का आदेश दिया है। महापौर भार्गव ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। समाजसेवी किशोर कोडवानी ने बीआरटीएस को सुगम यातायात में बाधक बताते हुए 2013 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि बीआरटीएस राइट साइड ड्राइविंग सिस्टम वाले देशों में चलता है। भारत में लेफ्ट साइड ड्राइविंग सिस्टम है, यहां ये प्रोजेक्ट नहीं चल सकता।बावजूद इसके, अधिकारियों की सनक से यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतरा गया। इसके अलावा सड़क का अधिकांश हिस्सा कॉरिडोर में ले लिया गया। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई। कई जगह बॉटल नेक की स्थिति भी बनती है, जिससे यातायात बाधित होता है। उनका ये भी कहना था कि बीआरटीएस पर चलने वाली बसों में कुछ हजार यात्री सफर करते हैं जबकि मिक्स लेन से गुजरने वाले वाहनों की संख्या लाखों में है। महज 02 फीसदी लोगों के लिए 98 फीसदी लोगों को असुविधा में डाल दिया गया, इसी के चलते उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट और प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे के बाद हाई कोर्ट ने बीआरटीएस हटाने का आदेश दिया है।उन्होंने इस बात पर निराशा जताई की हाई कोर्ट को भी फैसला लेने में 12 साल लग गए।
मुख्यमंत्री ने भी पिछले दिनों किया था ऐलान।
दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के बाद इंदौर का भी बीआरटीएस हटाने की बात कही थी। इसके बाद सरकार के रुख में भी बदलाव आया और हाई कोर्ट में बीआरटीएस हटाए जाने के पक्ष में सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया। इससे बीआरटीएस हटाए जाने की राह आसान हो गई।
तीन सौ करोड़ रुपए की लागत से बना था बीआरटीएस।
बता दें कि बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) के निर्माण पर 300 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की गई थी। पायलेट प्रोजेक्ट के बतौर निरंजनपुर से राजीव गांधी चौराहे तक साढ़े 11 किमी लंबाई में यह कॉरिडोर बनाया गया था। ये बात भी सच है कि देश में अहमदाबाद के बाद इंदौर में ही बीआरटीएस कॉरिडोर का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा था। वर्तमान में इसपर एआईसीटीएसएल 40 आई बसें चला रहा है, जिसमें करीब 60 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। इनमें भी ज्यादा संख्या छात्र – छात्राओं की है। बीआरटीएस खत्म किए जाने के बाद इसपर चलनेवाली बसें भी अब मिक्स लेन में ही चलेंगी।
बहरहाल, बीआरटीएस हटाने का आदेश तो जारी हो गया है पर इसके निर्माण पर खर्च तीन सौ करोड़ रुपए की भरपाई कैसे और किससे होगी, ये भी एक बड़ा सवाल है।