विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं की बढ़ाई परेशानी

  
Last Updated:  July 22, 2025 " 07:28 pm"

अब ऑनलाइन ही करना होगा विद्युत बिलों का भुगतान, सारे काउंटर किए बंद।

सत्ताधारी दल से जुड़े जनप्रतिनिधि बनें हुए हैं बेपरवाह।

🔺 बंसीलाल लालवानी 🔺

इंदौर : मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बगैर किसी पूर्व सूचना के अपने सारे कैश काउंटर बंद कर दिए हैं। परेशान उपभोक्ता एक से दूसरे कार्यालय भटक रहे हैं लेकिन कोई अधिकारी या कर्मचारी यह बताने को तैयार नहीं कि अब नकद भुगतान कहां लिया जाएगा। बगैर किसी कार्य योजना या सर्वे के लिया गया यह तुगलकी फैसला लाखों उपभोक्ताओं के लिए नया सर दर्द पैदा कर रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अब सभी विद्युत उपभोक्ताओं को अपने बिलों का भुगतान ऑनलाइन करना होगा। विद्युत वितरण कंपनी के लगभग दो तिहाई उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने आज तक यूपीआई या अन्य किसी भी तरह से ऑनलाइन पेमेंट नहीं किया है। साक्षरता की कमी एवं आए दिन हो रही ऑनलाइन ठगी से डरा उपभोक्ता अपना बहुमूल्य डाटा एक बार फिर बिकाऊ हाथों में देने को मजबूर किया जा रहा है। नीति निर्धारक पदों पर आसीन पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि बगैर किसी पूर्वानुमान के लोगों के साथ लूट व ठगी का एक नया रास्ता खोल रहे हैं। यूपीआई पेमेंट का डाटा लीक होने की स्थिति में हजारों लाखों विद्युत उपभोक्ता सीधे साइबर ठगों के निशाने पर आ जाएंगे। बड़े बकायादारों के आगे गिड़गिड़ाने वाले कर्मचारी, गरीब एवं मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर बकाया राशि वसूलने के लिए पिल पड़ेंगे आज भी शासकीय कार्यालय व बैंकों में अपने फार्म दूसरों से भरवाने वाले बड़ी तादाद में मिल जाएंगे, ऐसी स्थिति में विद्युत वितरण कंपनी का यह आदेश समझ से बाहर है। अपनी सेवाओं की कमियां छुपाते हुए शासकीय एजेंसियां आम आदमी की परेशानी बढ़ाने कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ऑनलाइन बिलों का भुगतान अनिवार्य करना इसी तरह का कदम है। इस निर्णय से एम.पी . ऑनलाइन वालों की जरूर चल निकलेगी क्योंकि अब विद्युत उपभोक्ताओं के पास दूसरा कोई विकल्प बचा ही नहीं है। बिल के साथ उसे करीब ₹30 प्रति बिल का अतिरिक्त बोझ भी उठाना होगा।

आए दिन विद्युत दरों में मनमानी बढ़ोतरी करना, मेंटेनेंस के नाम पर चाहे जब बिजली काटना, शिकायतों का समय पर समाधान न करना, हर कार्य के लिए जेब गर्म करवाना इस एकाधिकारी कंपनी की पुरानी फितरत है। इसकी नियमावली में उपभोक्ता अधिकार का कोई कॉलम ही नहीं है। हैरत की बात ये है कि मंत्री, सांसद से लेकर विधायक और पार्षद तक सत्ता दल से जुड़े हैं, बावजूद इसके विद्युत वितरण कंपनी मनमाने फैसले उपभोक्ताओं पर थोप रही है और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के जनहितैषी होने का ढोल तो खूब पीटा जाता है पर जनता को परेशानी में डालने वाले निर्णय ले लिए जाते हैं और सत्ताधीश चादर में मुंह छुपाकर सोए रहते हैं। कहीं ये बेपरवाई आने वाले समय में पटिए उलाल न कर दे, इसकी चिंता सत्ताधारियों को जरूर करनी चाहिए।

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