इंदौर की मैथिलानियों ने सहेजी मिथिला की संस्कृति

  
Last Updated:  August 23, 2026 " 06:23 pm"

सखी बहिनपा का 11वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया।

इंदौर : मिथिला की भाषा, संस्कृति, लोक परंपरा और संस्कारों को सहेजने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ सखी बहिनपा मैथिलानी समूह की इंदौर इकाई ने अपना 11वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। संस्था से देश-विदेश में 45 हजार से अधिक मैथिल महिलाएं जुड़ी हैं। स्थापना दिवस की शुरुआत खजराना गणेश मंदिर में सामूहिक दर्शन और भोग अर्पण के साथ हुई। इसके बाद खजराना अन्न क्षेत्र में श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराया गया। समूह की महिलाओं ने स्वयं भोजन परोसकर सेवा की।
इसके बाद अमर विलास होटल में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मिथिला के महाकवि विद्यापति के चित्र के समक्ष मुख्य अतिथि रेखा पंडित, समूह की इंदौर इकाई की प्रमुख ऋतु झा, शारदा झा, सुषमा झा, श्वेता मिश्रा, सोनी झा, कविता झा सहित अन्य मैथिलानियों ने दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया।

समारोह की शुरुआत महाकवि विद्यापति रचित प्रसिद्ध गोसाउनी मैथिली गीत ‘जय जय भैरवी असुर भयाऊनी’ के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद समूह की महिलाओं ने मिथिला के प्रसिद्ध झिझिया नृत्य, मैथिली लोकगीतों और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिथिला की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत किया। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की प्रस्तुतियों ने समारोह को विशेष आकर्षण दिया।

देश-विदेश में सैकड़ों शाखाएं।

समूह की प्रमुख ऋतु झा एवं संगठन सचिव शारदा झा ने बताया कि सखी बहिनपा मैथिलानी समूह की इंदौर सहित देश-विदेश में सैकड़ों शाखाएं हैं। 45 हजार से अधिक मैथिल महिलाएं संस्था से जुड़ी हैं। समूह विभिन्न आयोजनों के माध्यम से मिथिला की कला, संस्कृति, खानपान और त्योहारों का प्रचार-प्रसार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को केवल आयोजनों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को मैथिली भाषा, संस्कारों और रीति-रिवाजों से जोड़ना भी है। महिलाओं को अपने दैनिक जीवन में मैथिली भाषा और मिथिला की परंपराओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

संस्कृति के साथ सामाजिक सरोकार।

सखी बहिनपा मैथिलानी समूह सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता देता है। स्थानीय स्तर पर जरूरतमंद महिलाओं तथा समाज हित में कार्य करने वाली संस्थाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सहयोग किया जाता है। स्थापना दिवस समारोह में भी सेवा, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का संदेश प्रमुख रहा।

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