तिल चतुर्थी पर खजराना गणेश को चढ़ेगा सवा लाख लड्डुओं का भोग

  
Last Updated:  January 5, 2023 " 11:44 pm"

10 जनवरी से प्रारंभ होगा तिल चतुर्थी मेला।

प्रवासी भारतीयों के लिए पूजा – अर्चना के रहेंगे विशेष प्रबंध।

आठ भट्टियों पर 40 रसोइये तैयार करेंगे 9 जनवरी तक भक्तों के लिए प्रसाद।

इंदौर : खजराना गणेश मंदिर पर 10 से 12 जनवरी तक लगने वाले परंपरागत तिल चतुर्थी मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भक्त मंडल द्वारा तिल चतुर्थी मेले के शुभारंभ पर 10 जनवरी को तिल गुड़ के सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाने का संकल्प किया गया है। गुरुवार को मंदिर के पुजारी पं. मोहन भट्ट एवं पं. अशोक भट्ट द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लड्डुओं का निर्माण शुरू कर दिया गया। मेले का शुभारंभ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर इलैया राजा टी, निगमायुक्त प्रतिभा पाल एवं अन्य अतिथियों द्वारा 10 जनवरी को सुबह 10 बजे किया जाएगा।

भक्त मंडल के अरविंद बागड़ी एवं कैलाश पंच ने बताया कि शहर के प्रसिद्ध रसोइए खेमजी महाराज और उनकी टीम सवा लाख लड्डुओ का निर्माण कर रही है। लड्डू बनाने का काम 9 जनवरी की रात तक चलेगा। आठ भट्टियों पर चालीस रसोइये मिलकर लड्डुओं का निर्माण कर रहे हैं। 10 जनवरी को सुबह कलेक्टर एवं अन्य अतिथि खजराना गणेश मंदिर परिसर के 40 मंदिरों की ध्वजा का पूजन कर गणेशजी को भोग समर्पित करेंगे और भक्त मंडल द्वारा तैयार लड्डुओं का भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरण का शुभारंभ भी करेंगे।

लड्डु निर्माण के शुभारंभ अवसर पर मंदिर के प्रबंधक गौरीशंकर मिश्रा एवं घनश्याम शुक्ला भी मौजूद थे।

भक्त मंडल के अरविंद बागड़ी ने बताया कि तिल चतुर्थी मेले के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक पुष्प एवं विद्युत सज्जा से श्रृंगारित किया जा रहा है। मंदिर तक पहुंचने वाले सभी मार्गों की मरम्मत कर विद्युत व्यवस्था भी सुधारी जा रही है। मालवा का प्रख्यात मेला होने के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु इस मेले में आते हैं। मेले में प्रतिदिन भजन संध्या एवं पुष्प श्रृंगार आदि के आयोजन भी होंगे। तीन दिवसीय इस मेले में दूर-दूर के दुकानदार भी आते हैं और मनोरंजन के सभी देशी साधन, चकरी, झूले आदि भी लगाए जाते हैं।

प्रवासी भारतीयों की अगवानी के लिए विशेष प्रबंध।

खजराना गणेश मंदिर आने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए कलेक्टर इलैया राजा टी ने विशेष प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अन्न क्षेत्र, गर्भगृह तथा अन्य मंदिरों में कार्यरत पुजारियों व कर्मियों के लिए एक जैसी वेशभूषा वाले वस्त्र पहनने और प्रवासी भारतीयों के लिए पूजा अर्चाना के विशेष प्रबंध करने के लिए भी कहा है। मंदिर परिसर में रंगरोगन एवं सजावट का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।

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