‘बा और बापू – 150’ पर परिचर्चा में नदारद रही ‘बा’

  
Last Updated:  October 6, 2019 " 09:46 am"

इंदौर : महात्मा गांधी की 150 वी जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में अभ्यास मण्डल ने शनिवार शाम ‘बा और बापू 150’ विषय पर परिचर्चा रखी। इंदौर प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित इस परिचर्चा में करुणाकर त्रिवेदी, विष्णु बैरागी, डॉ. संगीता भरूका और स्वप्निल कोठारी ने भाग लिया। अध्यक्षता वरिष्ठ कांग्रेसी नेता केके मिश्रा ने की। डॉ. संगीता भरूका को छोड़ किसी भी वक्ता ने बा कि चर्चा विषय से सन्दर्भित नहीं की। सभी केवल बापू के व्यक्तित्व और कृतित्व की ही बातें करते रहें। एक वक्ता ने तो बोरियत की हद तक माइक नहीं छोड़ा।जब श्रोताओं का धैर्य जवाब देने लगा तो बमुश्किल वे हटे। डॉ. भरूका बापू से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते समय वर्ष को लेकर कई बार गफलत कर गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केके मिश्रा यहां भी सियासत के आवरण से बाहर नहीं निकल पाए। उनका भाषण पूरीतरह सियासती रंग लिए हुए था। उनका ऐतराज इस बात को लेकर भी था कि बीजेपी, आरएसएस गांधीजी का नाम क्यों ले रहे हैं। शायद उनका यही मानना है कि गांधीजी पर सिर्फ कांग्रेस का अधिकार है। विचारधारा की आड़ में पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधने से भी वे नहीं चूके।
खैर, परिचर्चा में बोलते हुए डॉ. संगीता भरूका ने गांधीजी के महात्मा बनने के सफर में बा के योगदान को अहम बताया। उनका कहना था कि बापू वटवृक्ष थे तो बा उसका बीज थी। बा निरक्षर भले ही थी लेकिन स्वाभिमानी थी। बा के विचारों को बापू भी मानते थे।
वरिष्ठ पत्रकार विष्णु बैरागी बोले तो खूब पर ऐसा की लोग ऊबने लगे। उनका कहना था कि बापू दोहरी जिंदगी नहीं जीते थे। अपने उसूलों के वे पक्के थे।दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का शिकार होने के के बाद उनके जीवन की दिशा बदली। छुआछूत के खिलाफ वे हमेशा लड़ते रहे। गांधी के विचार आज ज्यादा प्रासंगिक हैं।
शिक्षाविद स्वप्निल कोठारी का कहना था कि गांधी से ज्यादा प्रक्टिकल कोई और नहीं था। सफलता सही रास्ता अपनाकर हासिल की जाए ये ज्यादा महत्वपूर्ण है। यही गांधीवाद का हिस्सा है। जो अपने विचारों से न डिगे वो साहसी है। गांधी एक ऊर्जा है। गांधी को पढ़े बगैर हम धारणा बना लेते हैं। उनके विचार समाज को प्रेरित करते हैं।
गांधीवादी करुणाकर त्रिवेदी का कहना था कि गांधीजी वो व्यक्ति थे जिन्होंने पूरे देश को आंदोलित किया। देश का चरित्र निर्माण उन्होंने किया। ये हमारी कमजोरी है कि हम बापू के विचारों को अगली पीढ़ियों तक नहीं पहुंचा पाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा विषय पर कम बोले राजनीतिक वक्तव्य ज्यादा दिया।

गांधीवादियों का सम्मान।

महात्मा गांधी के कार्य और विचारों को आगे बढाने में योगदान देने वाले प्रो. बीके निलोसे, विसर्जन आश्रम के किशोर गुप्ता और समाजसेवी किशोर गुप्ता का इस मौके पर अभ्यास मण्डल की ओर से शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त इंदौर की परिकल्पना को साकार रूप देने में योगदान देते हुए कपड़े की थैलियों का कार्यक्रम में लोकार्पण करने के साथ उनका वितरण भी किया गया।
इस मौके पर मुकुंद कुलकर्णी, मनीषा गौर, नेताजी मोहिते रामेश्वर गुप्ता, परवेज खान और माला ठाकुर सहित अभ्यास मण्डल के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी वर्ग से जुड़े लोग मौजूद रहे।

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