बिना करदाता का पक्ष सुने असेसमेंट ऑर्डर में मनमाने ढंग से किए जा रहे एडिशन

  
Last Updated:  April 24, 2024 " 11:09 pm"

आयकर की धारा 147 के असेसमेंट आर्डर के विरुद्ध की जाने वाली अपील पर सेमिनार का आयोजन ।

इंदौर : टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन एवं इंदौर सीए शाखा द्वारा आयकर की धारा 147 के असेसमेंट आर्डर के विरुद्ध की जाने वाली अपील पर सेमिनार का आयोजन
किया गया ।

टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सीए जेपी सराफ ने कहा कि आयकर अधिनियम की पुरानी धारा 147 के तहत कर निर्धारण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों पूर्व धारा 148-A लाई गई थी लेकिन इसका फायदा होने के स्थान पर प्रोसीजर में और अधिक जटिलता आ गई। मार्च में हुए अधिकांश असेसमेंट ऑर्डर्स में करदाता का पक्ष सुने बिना विभाग द्वारा मनवाने ढंग से एडिशन किए गए।

इंदौर सीए शाखा के चेयरमैन सीए अतिशय खासगीवाला ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि यह देखना भी अत्यंत आवश्यक है कि धारा 148A का नोटिस 3 वर्ष की समय सीमा के भीतर है या उसके पश्चात क्योंकि 3 वर्ष के भीतर नोटिस आयकर विभाग के पास केवल कोई सूचना उपलब्ध है इस आधार पर जारी किया जा सकता है जबकि 3 वर्ष के बाद 50 लाख से अधिक की आय इनकम एस्केपिंग असेसमेंट होनी चाहिए वहीं उचित अधिकारी के पास एविडेंस भी होना चाहिए केवल सूचना पर्याप्त नहीं होगी।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे टीपीए के मानद सचिव सीए अभय शर्मा ने कहा कि जिस भावना से इस एक्ट में अमेंडमेंट किये गए थे उस भावना के अनुरूप असेसमेंट नहीं किए जा रहे हैं l अधिकांश असेसमेंट आर्डर में विभाग हाई पिच असेसमेंट कर रहा है अतः करदाता के पास अपील ही अंतिम और सबसे बड़ी रेमेडी बचती हैl इसलिए यह आवश्यक है कि जो भी अपील की जा रही है वह पूरी सावधानी से ड्राफ्ट की जाए।

मॉडरेटर सीए मनीष डफरिया, पेनलिस्ट सीए विजय बंसल, सीए पीडी नागर ने कहा कि आयकर धारा 147 के रि-असेसमेंट ऑर्डर के विरुद्ध की जाने वाली अपील मे निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए:-

(1) सर्वप्रथम यह देखा जाना चाहिए की असेसमेंट शुरू करने के पहले क्या धारा 148A का नोटिस उचित प्रकार से, सही समय पर व उचित अधिकारी की सहमति से दिया गया था। यदि नही तो अपील में इस संबंध मे आपति ली जाना चाहिए।

(2) यह भी देखा जाना चाहिए की जिस जानकारी के आधार पर रि-असेसमेंट प्रस्तवित था वह संपूर्ण जानकारी करदाता को धारा 148A के नोटिस के साथ दी गयी थी अथवा नहीं। यदि नहीं तो अपील में इस पर आपत्ति ली जाना चाहिये।

(3) कई मामलों में बिल्डर के यहां हुई सर्च के आधार पर आयकर विभाग ने प्लाट/मकान खरीददारों पर इस आधार पर एडिशन किया कि उन्होने बिल्डर को नगद राशि का भुगतान किया है । इस संबंध में यदि कर निर्धारण सिर्फ बिल्डर के कर्मचारी के बयान के आधार पर किया गया है तो इस तथ्य को अपील अधिकारी के संज्ञान में लाया जाना चाहिए। संबंधित बयानकर्ता व्यक्ति के प्रति परीक्षण/ क्रॉस एग्जामिनेशन की मांग भी की जा सकती है।

(4) वर्तमान में आयकर विभाग द्वारा असेसमेंट से संबंधित समस्त नोटिस व ऑर्डर ईमेल पर भेजे जाते हैं। कई व्यक्तियों विशेषतः किसानों आदि को ईमेल पर भेजे नोटिस का ज्ञान ही नही हो पाता है। ऐसे मामलो की संपूर्ण तथ्यात्मक जानकारी अपील में देकर नियम 46 A के तहत कागज दाखिल किये जाने चाहिए।

(5) यदि किसी कारणवश अपील 30 दिन की निर्धारित समय अवधि में नही दाखिल की जा सकी हो तो देरी के कारणों के लिए करदाता का शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में धन्यवाद् अभिभाषण सीआईआरसी के सदस्य सीए कीर्ति जोशी ने दिया l इस अवसर पर सीए शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, सीए अभिषेक गांग, सीए अनिल गर्ग, गोविंद गोयल, सीए उमेश गोयल, सीए योगेश तलवार, सीए शैलेंद्र पोरवाल, सीए गोविंद बाबू अग्रवाल मौजूद थे ।

Facebook Comments

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *