मालेगांव ब्लास्ट में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की रची गई थी साजिश

  
Last Updated:  August 3, 2025 " 12:47 am"

उच्च अधिकारियों ने संघ प्रमुख की गिरफ्तारी का बनाया था दबाव।

पूर्व एटीएएस अधिकारी महबूब मुजावर ने किया सनसनीखेज खुलासा।

मामले में साध्वी प्रज्ञा सहित सभी सातों आरोपियों को एनआईए अदालत ने किया बरी।

मुंबई : महाराष्ट्र के पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि मालेगांव ब्लास्ट के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की साजिश रची गई थी। उस समय के जांचकर्ता अधिकारी परमवीर सिंह और उच्च अधिकारियों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे।

2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में गुरुवार को एनआईए की स्पेशल अदालत ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित सहित सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया था। पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर मामले की जांच में शामिल थे।

भगवा आतंकवाद को सिद्ध करने के लिए गलत जांच का बनाया दबाव।

महबूब मुजावर ने बताया कि देश में ‘भगवा आतंकवाद’ के कॉन्सेप्ट को सिद्ध करने के लिए उन पर गलत जांच करने का दबाव बनाया गया था। मुजावर ने कहा कि मैंने इसका विरोध किया क्योंकि मैं गलत काम करना नहीं चाहता था। मुजावर ने कहा कि उन्होंने मुझ पर दबाव बनाया कि मैं मारे गए लोगों को चार्जशीट में जिंदा बताऊं, जब मैंने इससे इनकार किया तो उस समय के आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह ने मुझे झूठे मामले में फंसा दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद चाहे भगवा हो या हरा, समाज के लिए सही नहीं है। मुजावर ने ये भी कहा कि वह मालेगांव ब्लास्ट मामले में कोर्ट के फैसले से खुश हैं।

बता दें कि 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत और गवाह मौजूद नहीं हैं। अदालत ने कहा कि सिर्फ नैरेटिव के आधार पर किसी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। जस्टिस लाहोटी ने फैसले में लिखा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत और विश्वसनीय गवाह पेश नहीं कर सका। आरोपियों में पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी, रिटायर्ड रमेश उपाध्याय व अन्य शामिल थे।

Facebook Comments

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *