16 संस्कारों से ही दुनिया में हमारी पहचान- पं. शर्मा

  
Last Updated:  September 1, 2020 " 10:14 am"

इन्दौर : हम जीवन से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों में बंधे हुए हैं।इसी कारण दुनिया में अन्य देशों से हमें अलग पहचान मिली हुई है। सनातन धर्म की बुनियाद को भी मजबूती देने वाला सबसे श्रेष्ठ संस्कार है। भारत वेद-पुराणों, धर्मगुरूओं, ऋषि-मुनियों और धर्मशास्त्रों की भूमि है। हम जन्म, मुंडन, अन्नप्राशन, शिक्षारंभ से लेकर विवाह के लिए भी मुहूर्त और तिथि देखकर काम करते हैं क्योंकि हमारी आस्था और श्रद्धा अपनी परंपराओं में भी है। पश्चिम की संस्कृति डूबते हुए सूरज की है जहां विवाह से पहले तलाक हो जाता है या विवाह के बाद सात माह भी रिश्ता नहीं चल पाता।
ये विचार भागवताचार्य पं. हर्ष शर्मा ने व्यक्त किए। वे चंद्रभागा जूनी इंदौर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर पर सनाढ्य सभा इंदौर की मेजबानी में चल रहे आॅनलाइन संगीतमय भागवत ज्ञानयज्ञ के छठे दिन अपने प्रवचन दे रहे थे। कथा में कृष्ण रूक्मणी विवाह का आॅनलाइन उत्सव भी मनाया गया। कृष्ण और रूक्मणी ने एक दूजे को वरमाला पहनाई। भक्तों ने घर पर रहते हुए इस उत्सव का आनंद लिया। प्रारंभ में पं. भगवती शर्मा, सुभाषचंद्र थापक, संजय बिरथरे, अनिल शर्मा, धीरेंद्र बिरथरे, दीपक शर्मा आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी पुष्पा शर्मा, वंदना शर्मा, राकेश पाराशर, धमेंद्र दुबे, सत्यनारायण दंडोतिया ने की। सभा के अध्यक्ष पं. देवेंद्र शर्मा एवं महासचिव पं संजय जारोलिया ने बताया कि कथा प्रसंगानुसार दोपहर 2 से सांय 6 बजे तक सुदामा चरित्र एवं भागवत सार के साथ कथा का समापन होगा। कथा का आॅनलाइन प्रसारण सनाढय ब्राहम्ण समाज फेसबुक पेज पर लाईव किया जा रहा है। कथा स्थल पर सोशल डिस्टेंस, फेसमास्क एवं सेनेटाइजर सहित कोरोना से बचाव के सभी उपाय अपनाए जा रहे हैं। कथा में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध है।

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