वासंती रंग में सजी तरुण जत्रा में बिखरे लोक संस्कृति के रंग
इंदौर: मेले को मराठी में जत्रा कहा जाता है। मेले की परंपरा बरसों से चली आ रही है। समय के साथ मेला याने जत्रा के स्वरूप में बदलाव आया है पर खान-पान, खरीदारी और कला- संस्कृति की महक बरकरार है। अब सबकुछ सुनियोजित ढंग से होता है और लोगों की भागीदारी भी अच्छी- खासी रहती है। बहरहाल हम बात कर रहे हैं दशहरा मैदान पर आयोजित तरुण जत्रा की। वसंत ऋतु के आगमन के चलते इसे वसन्तोत्सव भी नाम दिया और पढ़े










