धन का सदुपयोग परमार्थ के कार्यों में करेंगे तो मृत्यु के बाद भी बनीं रहेगी यश, कीर्ति

  
Last Updated:  January 2, 2024 " 01:01 pm"

बिजासन रोड स्थित अखंड धाम आश्रम पर चल रहे अ.भा. संत सम्मेलन में बोले जगदगुरू शंकराचार्य ।

सुमित्रा ताई का किया गया सम्मान।

इंदौर : सदकर्म करने के लिए किसी मुहूर्त की प्रतीक्षा नहीं करना चाहिए। काल सबके पीछे लगा हुआ है। काल की पकड़ से कोई भी बच नहीं सकता, लेकिन यह भी याद रखें कि काल किसी भी आंख से दिखाई नहीं देता है, उसे तो ज्ञान से ही समझा जा सकता है। जीवन यापन के लिए धन की जरूरत सबको होती है, लेकिन उस धन का कितना अंश हम धर्म पर खर्च करें, यह हमारे संस्कारों पर निर्भर होता है। धन किसी के भी साथ नहीं जाएगा। धन का सदपुयोग धर्म और परमार्थ के कार्यों में करेंगे तो मृत्यु के बाद भी हमारी यश-कीर्ति बनी रहेगी। धन को व्यर्थ खर्च करने के बजाय धर्म के विस्तार में निवेश करें तो आने वाली पौध भी समाज और राष्ट्र के नव निर्माण में सहयोगी बन सकेगी। धन से हम केवल अपना या अपने बाद वाली पीढ़ी का उद्धार कर सकते हैं, लेकिन धर्म से कई पीढ़ियों का कल्याण संभव है।

ये प्रेरक विचार जगदगुरू शंकराचार्य भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने सोमवार को बिजासन रोड स्थित प्राचीन अखंड धाम आश्रम पर चल रहे 56वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन की धर्मसभा में व्यक्त किए।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, विजय कृष्णा गोयल, बालकृष्ण छावछरिया सहित अनेक गणमान्य बंधुओं ने सोमवार को संत सम्मेलन में पहुंचकर शंकराचार्य सहित अन्य संत-विद्वानों का स्वागत किया।

आयोजन समिति की ओर से श्रीमती महाजन, प्रेमचंद गोयल एवं बालकृष्ण छावछरिया का भी सम्मान किया गया। संत सम्मेलन में अखंड धाम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप, वृंदावन के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, वृंदावन से आए पं. हिमांशु महाराज, उज्जैन से आए स्वामी वेदानंद, रतलाम से आए स्वामी देव स्वरूप, सारंगपुर से आई साध्वी अर्चना दुबे, भीलवाड़ा के चिन्मय धाम आश्रम से आई साध्वी पद्माश्री, आचार्य पं. कल्याणदत्त शास्त्री ने भी अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ और उनके उत्तराधिकारी स्वामी वरुणानंद तीर्थ ने मुख्य रूप से संत सम्मेलन, देश के वर्तमान हालात एवं अन्य मुद्दों पर अपने विचार रखे। संचालन स्वामी जगदीश्वरानंद ने किया।

प्रारंभ में आयोजन समिति की ओर से अध्यक्ष हरि अग्रवाल, महासचिव सचिन सांखला, सचिव भावेश दवे, ठा. विजयसिंह परिहार, सीए विजय गोयनका, राजेन्द्र गर्ग, निरंजन पुरोहित, पलकेश कछवाह, ओमप्रकाश सांखला, ओम कछवाह, मुरलीधर धामानी, राजेन्द्र सोनी आदि ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। गुरुवंदना किरण ओझा ने प्रस्तुत की। आभार सचिन सांखला ने माना।

हजारों दीपों से होगी महाआरती।

अखंड धाम आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार 2 जनवरी को सुबह नौ बजे छप्पन भोग समर्पित किए जाने के बाद संत सम्मेलन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जो दोपहर 12 बजे तक चलेगी। दोपहर 12 बजे हजारों दीपों से महाआरती की जाएगी। आयोजन समिति के अध्यक्ष हरि अग्रवाल एवं महसचिव सचिन सांखला ने बताया कि संत सम्मेलन में आने वाले श्रद्धालु अपने-अपने घरों से दीपों की थाली सजाकर लाएंगे और आरती करेंगे। इसके साथ ही 56वें संत सम्मेलन का समापन होगा।

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