नागरिकता कानून किसी के ख़िलाफ़ नहीं, लोगों को भ्रमित कर दंगे भड़का रही कांग्रेस- राकेश सिंह

  
Last Updated:  December 21, 2019 " 06:13 am"

इंदौर : बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेशसिंह ने शुक्रवार शाम इंदौर प्रवास के दौरान मीडिया के साथियों से चर्चा करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन कानून संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप संसद के दोनों सदनों लोकसभा एवं राज्यसभा में व्यापक बहस के बाद पारित हुआ है। धार्मिक आधार पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में भारी प्रताड़ना और जुल्म का शिकार होकर जो अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थी रूप में भारत आए थे और बरसों से यहां जीवन यापन कर रहे हैं। भारत के अलावा किसी भी अन्य देश में उन्हें नागरिकता नहीं मिलती, इसलिए उन्हें नागरिकता देने के लिए यह कानून लाया गया। वे बरसों से इसकी बाट जोह रहे थे।

किसी के खिलाफ नहीं है नागरिकता संशोधन कानून।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का देश के किसी भी नागरिक से कोई सम्बन्ध नहीं है। किसी का कोई अधिकार नहीं छीना जा रहा है। यह कानून केवल उन पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए है जो सालों से यहां रह रहे हैं। नागरिकता मिलने से वे सम्मान के साथ जी सकेंगे।

मुस्लिमों को भ्रमित कर भड़का रही है कांग्रेस।

देश के विभिन्न हिस्सों और मप्र के जबलपुर में भड़की हिंसा को लेकर राकेश सिंह ने कहा कि इस कानून को लेकर कुछ लोग अनावश्यक रूप से जनता को, खासकर मुस्लिमों को भड़काने का काम कर रहे हैं। इनमें कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल शामिल हैं। राकेश सिंह ने जोर देकर कहा कि यह कानून देश के मुस्लिम भाईयों के खिलाफ नहीं है। इस कानून की वजह से उनके किसी भी अधिकार का हनन नहीं हो रहा है। देश में उन्हें जो अधिकार प्राप्त है, वो हमेशा रहेंगे। कांग्रेस अल्पसंख्यक समुदाय को भ्रमित कर देश में दंगे भड़काने का काम कर रही है। यह कानून नागरिकता देने का है किसी की नागरिकता छीनने का नहीं है।

नागरिकता कानून को रोकने का अधिकार राज्यों को नहीं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और मप्र के सीएम
कमलनाथ जनता को ये कहकर भ्रमित कर रहे हैं कि हम यह कानून लागू नहीं करेंगे जबकि उन्हें ऐसा कहने का हक नहीं है। शरणार्थियों को नागरिकता देने का यह कानून पूरे देश में लागू होगा। संवैधानिक रूप से बनाए गए इस कानून को रोकने का अधिकार राज्यों को नहीं है।

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