ढाई हजार पौधे लगाकर की गई शुरुआत।
इंदौर : विकास प्राधिकरण इस साल शहर के चिन्हित 19 बगीचों में ढाई लाख पौधे लगाएगा। इस अभियान की शुरुआत हरियाली अमावस की शाम जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कॉलेज के स्टूडेंट्स, समाजसेवियों द्वारा योजना क्रमांक 169 ए (MR10 पुल के समीप) ढाई हजार पौधे रोपने के साथ हुई।
संभागायुक्त-सह अध्यक्ष इविप्रा दीपक सिंह ने इस मौके पर अपने विचार रखते हुए कहा कि तेजी से शहर का विकास हो रहा है, ऐसे में पर्यावरण की चिंता करना हम सब की जिम्मेदारी होना चाहिए। शहर की एयर क्वालिटी बेहतर करने के लिए जनता की भागीदारी से ही क्लीन सिटी-ग्रीन सिटी का संकल्प पूरा किया जा सकता है।
पद्मश्री जनक पलटा ने कहा कि उन्होंने चालीस साल पहले पौधे लगाना शुरु किया। कैलाश भाई के अनुरोध पर पितृ पर्वत पर माता-पिता, सास-ससुर के नाम से पौधे लगाए थे जो अब वृक्ष बन चुके हैं।आयरलैंड से परिजन आते हैं तो देख कर अभिभूत हो जाते हैं। कोविड की दूसरी लहर में 65 हजार पौधे इस आह्वान के साथ बांटे थे कि ‘टीका लगाओ-पौधे ले जाओ’ । हम अंधेरा खत्म नहीं कर सकते, लेकिन दीपक तो लगा ही सकते हैं, इसी तरह पोल्यू़शन खत्म करने के लिए पेड़ लगाएं।
शहर में गत दशकों में हुआ पौधारोपण यदि सफल रहा है तो एक व्यक्ति अंबरीश केला की वजह से जिन्होंने पौधों के लिए पानी-टैंकर उपलब्ध कराए।
पद्मश्री भालू मोंढे ने कहा कि मियावाकी पद्धति से लगाए जा रहे ये पौधे जल्दी पनपते हैं।अगले साल तक ये 15 फुट के हो जाएंगे।
पर्यावरणविद अंबरीश केला ने कहा कि सरकार तो पहल कर ही रही है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर भी ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। उज्जैन-ओकारेश्वर-महेश्वर धार्मिक पर्यटन के लिए पहचाने जाते हैं। इन क्षेत्रों में पौधे लगाएंगे तो सिंहस्थ 2028 तक हरियाली श्रद्धालुओं के लिए सहयोगी रहेगी। इसी तरह महू में भी पौधारोपण अभियान जरूरी है।पेड़ काटने का जैसे कोई मौसम नहीं होता ऐसे ही पौधे लगाने का भी कोई मौसम नहीं होता। पौधे पनप जाएं इसकी भी चिंता हमें करना चाहिए।
कार्यक्रम में देरी से पहुंचे भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा सनातन संस्कृति को धर्म से जोड़ा ही इसलिए है कि हम प्रकृति का सम्मान करें व उसके प्रति आभार व्यक्त करना सदैव याद रखें। जिन पांच पेड़ों को हम सदैव से पूजते रहे हैं विज्ञान ने भी माना है कि ये पेड़ चैबीस घंटे ऑक्सीजन देते हैं। जीवन से लेकर मरण तक ये पेड़ हमारा साथ देते हैं। मरने पर दाह संस्कार के लिए साढ़े तीन क्विंटल लकड़ी लगती है। प्रकृति का उधार चुकाने के लिए कम से कम पांच पौधे लगाएं और उनकी तब तक देखरेख भी करें जब तक वो पनप ना जाएं।
लगाए गए पौधों की होगी पूरी देखभाल।
प्राधिकरण सीईओ आरपी अहिरवार ने संबोधित करते हुए कहा हम पौधे लगाकर छोड़ नहीं देते, कम से कम पंद्रह महीने उनकी निगरानी भी करते हैं। पिछले साल प्राधिकरण ने 17 गार्डनों में 2.35 लाख पौधे लगाए थे जो आज 10 से 15 फीट के हो गए हैं। पर्यावरण दिवस पर सिंदूर गार्डन में 11 सौ पौधे लगाए हैं। इस साल 19 गार्डन में ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है, जिसकी शुरुआत ढाई हजार पौधे से हुई है, यहां इतने ही पौधे और लगाएंगे। संबंधित एजेंसी डेढ़ साल देखभाल करती है। पौधारोपण के साथ ही बॉउंड्री, फेसिंग, पानी मिलता रहे इसके लिए बोरिंग, गार्डन विकसित करने के लिए पांच कर्मचारियों का स्टॉफ, ये सारा बजट पौधारोपण प्लॉनिंग में शामिल रहता है।कार्यक्रम का संचालन प्राधिकरण के जनसंपर्क अधिकारी कपिल भल्ला ने किया। आभार लकी अवस्थी ने माना।
चित्रकला स्पर्धा की विजेता छात्राएं सम्मानित ।
संभागायुक्त दीपक सिंह सहित अन्य अतिथियों ने इस अवसर पर आयोजित चित्रकला स्पर्धा की विजयी छात्राओं प्रथम रही अंकिता कदम, द्वितीय निकिता थावरे और तृतीय रहीं नंदिनी साहू को सम्मानित किया। सिंबायसिस कॉलेज की इन छात्राओं के साथ अन्य लोगों ने पौधारोपण भी किया।









