आचार्यश्री विहार कर पहुंचे तिलक नगर, रविवार को होंगे विशेष प्रवचन

  
Last Updated:  January 11, 2020 " 03:03 pm"

इंदौर : दिगम्बर जैन समाज के सबसे बड़े संत आचार्यश्री विद्या सागर जी महाराज ने शनिवार को उदय नगर से विहार कर लिया। अब आचार्यश्री और संघ तिलक नगर में विराजित है।
ब्रह्मचारी सुनील भैया ने बताया कि शनिवार को
संत शिरोमणी आचार्यश्री की महापुजा का सौभाग्य कालानी नगर दिगम्बर जैन समाज को मिला। श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर त्रिमूर्ति मंदिर के सभी पदाधिकारी और समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे। मंदिर समिति की ओर से आकर्षक पूजा की थाली सजायी गयी थी।

तिलक नगर में की गई आचार्यश्री की अगवानी।

मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने बताया कि दोपहर में 1.25 बजे सामायिक सभी संतों की लव कुश विद्यालय में हुई। इसके बाद आचार्य श्री के कक्ष में आचार्य भक्ति सभी मुनियों द्वारा की गयी। इसके बाद दोपहर 2 बजे आचार्यश्री ने विहार कर दिया। यहा से विहार कर आचार्यश्री और संघ ने सबसे पहले उदय नगर दिगम्बर जैन मंदिर के दर्शन किए और यहा स्थित प्रतिभा स्थली में चल रहे सभी कार्यों को देखा। उसके बाद यहां से गोयल नगर जैन मंदिर और कनाडिया रोड स्थित मंदिर के दर्शन कर के गुरुदेव तिलक नगर पहुँचे। यहां की प्रतिभा प्रतीक्षा के कार्यों को देखने के बाद तिलक नगर दिगम्बर जैन मंदिर के दर्शन किए। उदय नगर से तिलक नगर तक जगह- जगह समाज के लोगों ने गुरुवर की अगवानी की। जगह जगह रंगोली मांडना बनाए गए। वहीं आरती करने के साथ पाद प्रक्षालन भी किया गया। तिलक नगर में आचार्य श्री और पूरा संघ चंदा प्रभु माँगलिक भवन में विराजित है। आचार्य श्री को इसीलिए अनियत विहारी कहा जाता है क्योंकि उनके विहार की सूचना किसी को नहीं रहती है।

भावुक हो गया माहौल।

उदय नगर से जैसे ही गुरुदेव का विहार शुरू हुआ, रहवासियों के चेहरे मुरझा गए। प्रतिभा स्थली की बहनें भी भावुक हो गई।लोगों ने भीगी आंखों से आचार्यश्री को विदाई दी। रविवार को विशेष प्रवचन के लिए उदय नगर समाज द्वारा बड़े पांडाल और मंच का का निर्माण किया गया था पर आचार्यश्री के विहार करने से ये तैयारी काम की नहीं रही।

रविवार को विशेष प्रवचन का लाभ मिलेगा।

दयोदय ट्रस्ट के ट्रस्टी सचिन जैन ने बताया कि रविवार 12 जनवरी को आचार्यश्री के विशेष प्रवचन होंगे। महावीर नगर में सरस्वती स्कूल के सामने मैदान में प्रवचन दोपहर 2 बजे से होंगे। एक घंटे के प्रवचन होंगे। इस अवसर पर संघ के सभी मुनिराज भी मौजूद रहेंगे। हर दिन की तरह आचार्यश्री की पूजा, पाद प्रक्षालन और अन्य माँगलिक क्रिया तो सुबह ही होगी। सिर्फ़ हर रविवार को विशेष प्रवचन होंगे।

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