गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन की अनसुलझी पहेलियों को खोलने की चाबी है- साध्वी परमानंदा

  
Last Updated:  December 24, 2020 " 08:02 pm"

इंदौर : गीता अजर-अमर, अचल और अविनाशी अमृत प्रवाह है। गीता, बंधन से मोक्ष की यात्रा कराती है। गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन की अनसुलझी पहेलियों को खोलने की चाबी है। गीता केवल 21 मिनट में पूरी हो गई लेकिन हम इस पूरे जन्म में भी उसे नहीं समझ पा रहे हैं।
ये दिव्य विचार हैं, गोधरा की साध्वी परमानंदा सरस्वती के, जो उन्होंने मनोरमागंज स्थित गीता भवन में 63वें अ.भा. गीता जयंती महोत्सव के पहले दिन व्यक्त किए। महोत्सव का शुभारंभ अध्यक्षता कर रहे वृंदावन के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती, अखंड धाम के महामंडलेश्वर डाॅ. स्वामी चैतन्य स्वरूप, नैमिषारण्य से आए स्वामी पुरूषोत्तमानंद, पानीपत के स्वामी दिव्यानंद, हरिद्वार से आए स्वामी गोपालानंद एवं सर्वेश चैतन्य महाराज तथा डाकोर के स्वामी देवकीनंदन दास ने दीप प्रज्जवलन कर किया। प्रारंभ में गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपालदास मित्तल, मंत्री राम ऐरन, सत्संग समिति के संयोजक रामविलास राठी, न्यासी मंडल के प्रेमचंद गोयल, गीता भवन हाॅस्पिटल के डायरेक्टर डाॅ. आर.के. गौड़, ट्रस्ट की सचिव प्रमिला नामजोशी, अरविंद नागपाल आदि ने सभी संत-विद्वानों का स्वागत किया। इसके पूर्व आचार्य पं. कल्याणदत्त शास्त्री के निर्देशन में पांच विद्वानों ने वैदिक मंगलाचरण के बीच शंख-ध्वनि की। महोत्सव के साथ ही पांच दिवसीय विष्णु महायज्ञ का भी शुभारंभ हुआ। गीता भवन परिसर में महोत्सव में आने वाले भक्तों को प्रवेश द्वार पर सेनेटाइजर से हाथ धोने और इंफ्रारेडगन से जांच के उपरांत ही प्रवेश दिया गया। प्रवचन स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए कुर्सियों पर बैठक व्यवस्था रखी गई है। मास्क पहने बिना किसी को भी प्रवेश नहीं दिया गया।

मास्क पहनने की शपथ।

सभा के समापन अवसर पर वृंदावन के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने उपस्थित भक्तों को कोरोना से जूझने के लिए हमेशा मास्क पहनने की शपथ दिलाई। ट्रस्ट के मंत्री राम ऐरन ने बताया कि महोत्सव के पांचों दिन संत-विद्वानों द्वारा भक्तों को अलग-अलग संकल्प दिलाएं जाएंगें।

वक्ताओं ने किया कोरोना और गीता भवन के इंतजामों का जिक्र।

गीता जयंती महोत्सव में आए लगभग सभी वक्ताओं ने कहा कि कोरोना काल जैसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भी गीता जयंती महोत्सव का आयोजन करना एक चुनौतीपूर्ण और साहसिक निर्णय है। यहां की व्यवस्थाओं में भक्तों को पूरा सहयोग देना चाहिए। लंबे अर्से बाद गीता जयंती महोत्सव के रूप में यह आयोजन हम सबके लिए सौभाग्य का विषय है।

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