रिटर्न फाइल न किए जाने पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर किया जा सकता है कर निर्धारण

  
Last Updated:  October 16, 2022 " 01:27 pm"

जी. एस.टी के अंतर्गत कर निर्धारण एवं अपील प्रावधानों पर कार्यशाला आयोजित।

इंदौर : हमारे देश में जी. एस.टी. लागू हुए 5 वर्ष से अधिक समय हो गया है। अभी तक करदाता इसके प्रावधानों को समझते हुए रिटर्न फाइल कर रहा था ।
अब विभाग द्वारा नोटिस जारी करके या ऑडिट के माध्यम से कर का निर्धारण किया जा रहा है। कर निर्धारण एवं अधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेश से असंतुष्ट होने की दशा में अपील के प्रावधानों पर चर्चा के लिए टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके मुख्य वक्ता थे सी.ए.पीयूष वोहरा।
श्री वोहरा ने कर निर्धारण के विभिन्न प्रावधानों की व्याख्या करते हुए बताया कि यदि करदाता द्वारा रिटर्न फाइल नहीं किए जाते हैं तो उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसका कर निर्धारण किया जा सकता है।यदि कोई व्यक्ति उसके द्वारा की जा रही सप्लाई के मूल्यांकन या उसके सप्लाई पर कर की दर क्या होगी, के संबंध में विभाग को आवेदन करके अपना अस्थाई कर निर्धारण ( प्रोविजनल असेसमेंट) करवा सकता हैं। ऐसी दशा में अधिकारी उसके द्वारा सप्लाई किए जा रहे वस्तु या सर्विस को देखते हुए करदाता का कर निर्धारण किया जाता है ।
जिन करदाताओं द्वारा रिटर्न फाइल किए जा रहे हैं, उनमें प्रमुख रूप से गलत दर से कर का भुगतान या इनपुट टैक्स क्रेडिट संबंधित प्रावधानों का पालन नहीं करने पर अधिकारी द्वारा कर भुगतान के स्पष्टीकरण के लिए ASMT 10 जारी किया जाएगा। करदाता यदि अपनी गलती स्वीकार करके कर का भुगतान ब्याज सहित आगे की कार्रवाई के पूर्व ही भर दिया जाता है तो उस पर पेनल्टी नही लगाई जाएगी। भुगतान नहीं करने पर अधिकारी, करदाता द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट होने पर कार्रवाई समाप्ति का ऑर्डर एवं असंतुष्ट होने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा । इसके पश्चात पुनः करदाता को सुनवाई का मौका देकर ऑर्डर पास किया जाता है।

अधिकारी द्वारा जारी किए गए ऑर्डर पर पुनः करदाता को कर का भुगतान निश्चित पेनल्टी के साथ भरने का मौका होता है। यदि वह सहमत नही हो तो तीन माह में अपील फाइल कर सकता है। किसी विशेष परिस्थिति में अपील समय पर फाइल नहीं करने पर अधिकारी 1 माह का समय और दे सकता है । अपील फाइल करने के लिए विवादित राशि का 10% pre deoisit करना आवश्यक है। इसके पश्चात हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी अपील फाइल की जा सकती है।

पीयूष वोहरा ने कहा कि जीएसटी के अंतर्गत कर की मांग मुख्यतया इनपुट टैक्स क्रेडिट एवं सप्लाई के उचित वर्गीकरण (क्लासिफिकेशन) नही करने पर हो रही है ।

सीए जेपी सराफ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि जीएसटी के अंतर्गत नोटिस ऑनलाइन दिए जा रहे हैं अतः जीएसटी विभाग को दिए गए ई मेल को समय समय पर देखने का आग्रह किया ताकि नोटिस की जानकारी समय पर हो सके एवं उसका स्पष्टीकरण फाइल किया जा सके।
कार्यक्रम का संचालन सचिव सी ए कृष्ण गर्ग ने किया। कार्यक्रम में प्रकाश वोहरा, दीपक माहेश्वरी, सुनील जैन, पुरषोत्तम मोटलानी एवं बड़ी संख्या में सी ए , कर सलाहकार एवं अधिवक्ता उपस्थित थे।

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